प्राणापान का स्तोम 'वाहिष्ठ' है -
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्राणापानो! (वां स्तोमः) = आपका यह स्तवन हवानाम् - स्तोमों में वाहिष्ठ: - वोढृतम है। प्राणापान की साधना ही सर्वोत्तम स्तुति है। प्राणापान चित्तवृत्ति का निरोध करके हमें प्रभु प्रवण करता है। एवं प्राणापान का स्तवन प्रभु का स्तवन हो जाता है, यह हमें प्रभु तक ले जाता है। हे (नरा) = उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! यह स्तोम (दूतः) = दूत बनता है, ज्ञान-सन्देश को प्राप्त करानेवाला होता है और (हुवत्) = हमारे हृदयों में आसीन होने के लिये प्रभु को पुकारता है। [२] सो हे (अश्विना) = प्राणापानो! हमारा स्तोम तो (युवाभ्यां भूतु) = आपके लिये ही हो। हम आपकी ही आराधना करें। यह आराधना ही हमारे लिये वाहिष्ठ होगी, हमें अतिशयेन प्रभु के समीप प्राप्त करानेवाली होगी।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणापान का स्तवन सर्वोत्तम स्तवन है, यह हमें प्रभु के अतिशयेन समीप पहुँचानेवाला है।