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वाहि॑ष्ठो वां॒ हवा॑नां॒ स्तोमो॑ दू॒तो हु॑वन्नरा । यु॒वाभ्यां॑ भूत्वश्विना ॥

English Transliteration

vāhiṣṭho vāṁ havānāṁ stomo dūto huvan narā | yuvābhyām bhūtv aśvinā ||

Pad Path

वाहि॑ष्ठः । वा॒म् । हवा॑नाम् । स्तोमः॑ । दू॒तः । हु॒व॒त् । न॒रा॒ । यु॒वाभ्या॑म् । भू॒तु॒ । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.२६.१६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:16 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:29» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:16


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - (नरा+अश्विना) हे प्रजाओं के नेता अश्विद्वय ! (हवानाम्) आह्वानकर्ता और प्रार्थनाकारी हम लोगों का (स्तोमः) स्तोत्र अर्थात् यशःप्रसारक गानविशेष ही (दूतः) दूत होकर वा दूत के समान (वाम्+हुवत्) आप दोनों को निमन्त्रण कर यहाँ ले आवे। जो स्तुतिगान (वाहिष्ठः) आपके यशों का इधर-उधर अतिशय ले जानेवाला है तथा वह स्तोम (युवाभ्याम्+भूतु) आप सबको प्रिय होवे ॥१६॥
Connotation: - हमारे समस्त काम राज्यप्रियसाधक हों ॥१६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्राणापान का स्तोम 'वाहिष्ठ' है -

Word-Meaning: - [१] हे प्राणापानो! (वां स्तोमः) = आपका यह स्तवन हवानाम् - स्तोमों में वाहिष्ठ: - वोढृतम है। प्राणापान की साधना ही सर्वोत्तम स्तुति है। प्राणापान चित्तवृत्ति का निरोध करके हमें प्रभु प्रवण करता है। एवं प्राणापान का स्तवन प्रभु का स्तवन हो जाता है, यह हमें प्रभु तक ले जाता है। हे (नरा) = उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! यह स्तोम (दूतः) = दूत बनता है, ज्ञान-सन्देश को प्राप्त करानेवाला होता है और (हुवत्) = हमारे हृदयों में आसीन होने के लिये प्रभु को पुकारता है। [२] सो हे (अश्विना) = प्राणापानो! हमारा स्तोम तो (युवाभ्यां भूतु) = आपके लिये ही हो। हम आपकी ही आराधना करें। यह आराधना ही हमारे लिये वाहिष्ठ होगी, हमें अतिशयेन प्रभु के समीप प्राप्त करानेवाली होगी।
Connotation: - भावार्थ- प्राणापान का स्तवन सर्वोत्तम स्तवन है, यह हमें प्रभु के अतिशयेन समीप पहुँचानेवाला है।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्तते।

Word-Meaning: - हे नरा=नेतारौ ! अश्विना=अश्विनौ। हवानाम्= ह्वातॄणामस्माकम्। वाहिष्ठः=अतिशयेन यशोवोढा। स्तोमः। दूतः=दूत इव भूत्वा। वाम=युवाम्। हुवत्=आह्वयतु। तथा स स्तोमः। युवाभ्यां प्रियः। भूतु=भवतु ॥१६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, rulers and leading lights of the nation, may the song of our invocation to you be the instant and most effective messenger to you and bring you here to the yajnic hall.