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त्वं भु॑वः प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्या ऋ॒ष्ववी॑रस्य बृह॒तः पति॑र्भूः। विश्व॒माप्रा॑ अ॒न्तरि॑क्षं महि॒त्वा स॒त्यम॒द्धा नकि॑र॒न्यस्त्वावा॑न् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvam bhuvaḥ pratimānam pṛthivyā ṛṣvavīrasya bṛhataḥ patir bhūḥ | viśvam āprā antarikṣam mahitvā satyam addhā nakir anyas tvāvān ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम्। भु॒वः॒। प्र॒ति॒ऽमान॑म्। पृ॒थि॒व्याः। ऋ॒ष्वऽवी॑रस्य। बृ॒ह॒तः। पतिः॑। भूः॒। विश्व॑म्। आ। अ॒प्राः॒। अ॒न्तरि॑क्षम्। म॒हि॒ऽत्वा। स॒त्यम्। अ॒द्धा। नकिः॑। अ॒न्यः। त्वाऽवा॑न् ॥

ऋग्वेद » मण्डल:1» सूक्त:52» मन्त्र:13 | अष्टक:1» अध्याय:4» वर्ग:14» मन्त्र:3 | मण्डल:1» अनुवाक:10» मन्त्र:13


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर वह परब्रह्म कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे जगदीश्वर ! जो (त्वम्) आप (पृथिव्याः) विस्तृत आकाश और (भुवः) भूमि के (प्रतिमानम्) परिमाणकर्त्ता तथा (बृहतः) महाबलयुक्त (ऋष्ववीरस्य) बड़े गुणयुक्त जगत् का वा महावीर मनुष्य के (पतिः) पालन करनेवाले (भूः) हैं तथा आप (विश्वम्) सब जगत् (अन्तरिक्षम्) अनेक लोकों के मध्य में अवकाशस्वरूप आकाश और (सत्यम्) कारणरूप से अविनाशी अच्छे प्रकार परीक्षा किये हुए चारों वेदों को (महित्वा) बड़ी व्याप्ति से व्याप्त होकर (अद्धाप्राः) साक्षात्कार पूरण करते हो, इससे (त्वावान्) आप के सदृश (अन्यः) दूसरा (नकिः) विद्यमान कोई भी नहीं है ॥ १३ ॥
भावार्थभाषाः - जैसे परमेश्वर ही सब जगत् की रचना, परिमाण, व्यापक और सत्य का प्रकाश करनेवाला है, इससे ईश्वर के सदृश कोई भी पदार्थ न हुआ और न होगा, ऐसा समझ के हम लोग उसी की उपासना करें ॥ १३ ॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अनन्यसदृश प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - १. गतमन्त्र का 'स्वभूत्योजाः' आत्मिक ऐश्वर्य व तेजवाला व्यक्ति प्रभु का उपासन करता हुआ कहता है कि (त्वम्) = आप ही (पृथिव्याः) = इस सम्पूर्ण पृथिवी के (प्रतिमानं भुवः) = परिमाण को करनेवाले हैं । इस पृथिवी का निर्माण आप ही करते हैं । २. इस (बृहतः) = विशाल (ऋष्ववीरस्य) = [ऋष्य - दर्शनीय वीर 'वि ईर' विशिष्ट गतिवाले लोक - लोकान्तर] अनन्त दर्शनीय लोक - लोकान्तरों से पूर्ण अन्तरिक्ष के (पतिः भूः) = रक्षक हैं । 'यो अन्तरिक्षे रजसो विमानः' प्रभु ही अन्तरिक्ष में विशेष मानपूर्वक लोकों का निर्माण करते हैं । ३. (महित्वा) = अपनी महिमा से (विश्वं अन्तरिक्षम्) = सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को (आप्राः) = आप पूर्ण किये हुए हैं । आप सर्वव्यापक हैं । ४. (सत्यम् अद्धा) = वास्तव में ही (त्वावान्) = आप - जैसा (अन्यः नकिः) = और कोई नहीं है । अपनी महिमा से आप 'अनन्य' ही हो । इसी से कहते हैं कि 'एकमेवाद्वितीयम्' आप एक ही हो, अद्वितीय हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - वे त्रिलोकी के पति प्रभु अपनी महिमा से अद्वितीय हैं । इस प्रभु का उपासक भी महिमाशाली जीवनवाला होता है ।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनः स कीदृश इत्यपुदिश्यते ॥

अन्वय:

हे जगदीश्वर ! यस्त्वं पृथिव्या भुवः प्रतिमानं बृहतं ऋष्ववीरस्य जगतो महावीरस्य मनुष्यस्य पतिर्भूरसि त्वं विश्वं सर्वं जगदन्तरिक्षं सत्यं च महित्वाऽद्धाप्राः तस्मात् कश्चिदन्यस्त्वावान् नकिर्विद्यते ॥ १३ ॥

पदार्थान्वयभाषाः - (त्वम्) जगदीश्वरः (भुवः) भवतीति भूस्तस्याः (प्रतिमानम्) परिमाणम् (पृथिव्याः) विस्तृतस्याकाशस्य (ऋष्ववीरस्य) ऋष्वा महान्तो गुणा वीरा वा यस्य तस्य (बृहतः) महाबलस्य (पतिः) पालकः (भूः) भवसि (विश्वम्) सर्वं जगत् (आ) समन्तात् (अप्राः) प्रपूर्द्धि (अन्तरिक्षम्) अनेकेषां लोकानाम् मध्येऽवकाशरूपं वर्त्तमानमाकाशम् (महित्वा) महत्या व्याप्त्याभिव्याप्य (सत्यम्) अव्यभिचारि सुपरीक्षितं वेदचतुष्टयजन्यम् (अद्धा) साक्षात् (नकिः) नैव (अन्यः) कश्चिदपि द्वितीयः (त्वावान्) त्वत्सदृशः ॥ १३ ॥
भावार्थभाषाः - यथा परमेश्वरः सर्वस्य जगतो रचयिता परिमाणकर्ता व्याप्तः सत्यप्रकाशकोऽस्त्यत ईश्वरसदृशः कश्चिदपि पदार्थो न भूतो न भविष्यतीति मत्वा तमेव वयमुपास्महे ॥ १३ ॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - You are the ultimate measure of the earth and the skies. You are the highest lord and master of the wondrous world of heroes. Having pervaded the world, having measured the spaces and transcended, you are the ultimate truth of eternal reality. No one is like you, none in image, symbol or measure, none, nothing.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

How is Indra (God) is taught further in the 13th. Mantra.

अन्वय:

Thou art the measurer of the extended earth, the vast firmament, the master or Lord of lofty heaven and the mighty heroes of this world. Thou hast perfectly filled all the atmosphere and the sky as well as Truth contained in the Vedas by Thy greatness and glory. Truly therefore there is none other like Thee.

पदार्थान्वयभाषाः - ( प्रतिमानम् ) परिमाणम् = Measure. ( पृथिव्याः ) विस्तृतस्याकाशस्य पृथिवीत्यन्तरिक्षनाम ( निघ० १.३) = of the vast sky. (ऋष्यवीरस्य) ऋष्वा महान्तो गुणवीरा वा यस्य = Whose virtues and heroes are great. ( ऋष्व इति महन्नामसु निघ० ३.३ ) ( सत्यम्) अव्यभिचारि सुपरीक्षितं वेदचतुष्टयम् = Perfect and infallible.
भावार्थभाषाः - We should adore God only knowing that He is the Creator and measurer of this world, Omnipresent Illuminator of Truth and therefore there is none, has never been and will never be like or equal to Him.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - परमेश्वरच सर्व जगाचा निर्माता, परिमाण करणारा, व्यापक व सत्यप्रकाशक आहे. त्यामुळे ईश्वराप्रमाणे कोणताही पदार्थ झालेला नाही व होणार नाही असे समजून आम्ही त्याचीच उपासना करावी. ॥ १३ ॥