सूर्य॑ऽएका॒की च॑रति च॒न्द्रमा॑ जायते॒ पुनः॑। अ॒ग्निर्हि॒मस्य॑ भेष॒जं भूमि॑रा॒वप॑नं म॒हत्॥१० ॥
सूर्यः॑। ए॒का॒की। च॒र॒ति॒। च॒न्द्रमाः॑। जा॒य॒ते॒। पुन॒रिति॒ऽपुनः॑। अ॒ग्निः। हि॒मस्य॑। भे॒ष॒जम्। भूमिः॑। आ॒वप॑न॒मित्या॒वप॑नम्। म॒हत्॥१० ॥
हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब पिछले मन्त्र में कहे प्रश्नों के उत्तर को कहते हैं ॥
संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ पूर्वोक्तप्रश्नानामुत्तराण्याह ॥
(सूर्य्यः) सविता (एकाकी) (चरति) (चन्द्रमाः) चन्द्रलोकः (जायते) (पुनः) (अग्निः) पावकः (हिमस्य) (भेषजम्) (भूमिः) (आवपनम्) (महत्) ॥१० ॥
