सि॒ञ्चन्ति॒ परि॑ षिञ्च॒न्त्युत्सि॑ञ्चन्ति पु॒नन्ति॑ च। सुरा॑यै ब॒भ्र्वै मदे॑ कि॒न्त्वो व॑दति कि॒न्त्वः ॥२८ ॥
सि॒ञ्चन्ति॒। परि॑। सि॒ञ्च॒न्ति॒। उत्। सि॒ञ्च॒न्ति॒। पु॒नन्ति॑। च॒। सुरा॑यै। ब॒भ्र्वै। मदे॑। कि॒न्त्वः। व॒द॒ति॒। कि॒न्त्वः ॥२८ ॥
हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब विद्वानों के विषय में शरीरसम्बन्धी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥
संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ विद्वद्विषये शारीरिकविषयमाह ॥
(सिञ्चन्ति) (परि) सर्वतः (सिञ्चन्ति) (उत्) (सिञ्चन्ति) (पुनन्ति) पवित्रीभवन्ति (च) (सुरायै) सोमाय (बभ्र्वै) बलधारकाय (मदे) आनन्दाय (किन्त्वः) किमसौ (वदति) (किन्त्वः) किमन्यः ॥२८ ॥
