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इन्द्रो॒ न यो म॒हा कर्मा॑णि॒ चक्रि॑र्ह॒न्ता वृ॒त्राणा॑मसि सोम पू॒र्भित् । पै॒द्वो न हि त्वमहि॑नाम्नां ह॒न्ता विश्व॑स्यासि सोम॒ दस्यो॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

indro na yo mahā karmāṇi cakrir hantā vṛtrāṇām asi soma pūrbhit | paidvo na hi tvam ahināmnāṁ hantā viśvasyāsi soma dasyoḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्द्रः॑ । न । यः । म॒हा । कर्मा॑णि । चक्रिः॑ । ह॒न्ता । वृ॒त्राणा॑म् । अ॒सि॒ । सो॒म॒ । पूः॒ऽभित् । पै॒द्वः । न । हि । त्वम् । अहि॑ऽनाम्नाम् । ह॒न्ता । विश्व॑स्य । अ॒सि॒ । सो॒म॒ । दस्योः॑ ॥ ९.८८.४

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:88» मन्त्र:4 | अष्टक:7» अध्याय:3» वर्ग:24» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:5» मन्त्र:4


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो सोम (इन्द्रो न) इन्द्र के समान (महाकर्म्माणि) बड़े-बड़े कर्म्मों को (चक्रिः) करता है। (वृत्राणां हन्ता असि) अज्ञानों के तुम हनन करनेवाले हो। (सोम) हे सोम ! (पूर्भित्) अज्ञानरूपी ग्रन्थियों को भेदन करनेवाले हो (पैद्वो, न) और विद्युत् के समान (अहिनाम्नां) अन्धकारों के (हन्ता) हनन करनेवाले हो। (विश्वस्य दस्योः) सम्पूर्ण दस्युओं के आप (हन्ता, असि) हनन करनेवाले हैं ॥४॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा सब प्रकार के अज्ञानों का नाश करनेवाला है। उसकी कृपा से उपासक में ऐसा प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे वह विद्युत् के समान तेजस्वी बनकर विरोधी शक्तियों का दलन करता है ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

महाकर्माणि चक्रिः दस्यो हन्ता

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्रः न) = सब बल के कर्मों को करनेवाले प्रभु की तरह (यः) = जो तू महाकर्माणि महान् कर्मों को (चक्रिः) = करनेवाला है वह तू (वृत्राणाम्) = ज्ञान की आवरणभूत वासनाओं का (हन्ता) = विनाश करनेवाला है। हे सोम ! तू (पूर्भित् असि) = असुरों की पुरियों का विदारण करनेवाला है। 'काम- क्रोध-लोभ' तीनों की पुरियों का विदारण करके तू हमें सशक्त शरीरवाला, निर्मल हृदयवाला तथा परिशुद्ध बुद्धिवाला बनाता है। (पैद्वः न) = निरन्तर गतिशील अश्व की तरह हे सोम ! (त्वम्) = तू (हि) = निश्चय से (अहिनाम्नाम्) = अहि नामवाले शत्रुओं का (हन्ता असि) = विनाशक है। इन अहि [वृत्र] नाम का ही नहीं, अपितु (विश्वस्य दस्योः) = सब विनाशक शत्रुओं का तू हन्ता असि=नाश करनेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें प्रभु की तरह महान् कार्यों को करनेवाला बनाता है, और वासनाओं को नष्ट करता है।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (यः) योऽयं सोमः (इन्द्रः, न) इन्द्रतुल्यः (महाकर्म्माणि) महतां कर्म्मणां (चक्रिः) कारकोऽस्ति। (सोम) हे परमात्मन् ! (वृत्राणां, हन्ता, असि) त्वमज्ञानानां नाशकोऽसि। (पूर्भित्) अज्ञानग्रन्थिभेदकोऽसि। (पैद्वः, न) विद्युदिव त्वं (अहिनाम्नां) तमसां (हन्ता) घातकश्चासि। (विश्वस्य, दस्योः) त्वं निखिलदस्यूनां (हन्ता, असि) हननकर्तासि ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, who are a great performer like Indra, the omnipotent, you are the destroyer of demonic forces and the breaker of their strongholds. Like lazer beams, you are the killer of the malignant, the poisonous and all the other negativities of the world.