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वृ॒ष्टिं दि॒वः परि॑ स्रव द्यु॒म्नं पृ॑थि॒व्या अधि॑ । सहो॑ नः सोम पृ॒त्सु धा॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
vṛṣṭiṁ divaḥ pari srava dyumnam pṛthivyā adhi | saho naḥ soma pṛtsu dhāḥ ||
पद पाठ
वृ॒ष्टिम् । दि॒वः । परि॑ । स्र॒व॒ । द्यु॒म्नम् । पृ॒थि॒व्याः । अधि॑ । सहः॑ । नः॒ । सो॒म॒ । पृ॒त्ऽसु । धाः॒ ॥ ९.८.८
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ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:8» मन्त्र:8
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:31» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:8
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! (दिवः) द्युलोक से (वृष्टिम्, परिस्रव) वृष्टि द्वारा (द्युम्नम्) अन्नादि एश्वर्यों को दीजिये और (पृथिव्याः अधि) सर्वत्र पृथिवी में (नः) हमको (सहः) बल देकर (पृत्सु धाः) युद्धों में विजयी करिये ॥८॥
भावार्थभाषाः - जो लोग परमात्मविश्वासी होते हैं, परमात्मा उनको युद्धों में विजयी और धनादि ऐश्वर्यों से नानाविधैश्वर्यसम्पन्न करता है ॥८॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
आनन्द वृष्टि
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! तू (दिवः) = मस्तिष्क रूप द्युलोक से (वृष्टिं) = धर्ममेघ समाधि में होनेवाली आनन्द की वर्षा को (परिस्रव) = परिस्रुत कर । सोमरक्षण से मनुष्य योग की अगली अगली भूमिकाओं में पहुँचता हुआ इस धर्ममेघ समाधि की अन्तिम मंजिल में भी पहुँचता है और आनन्द की वर्षा का अनुभव करता है। [२] हे सोम ! तू (पृथिव्याः) = इस पृथिवी रूप शरीर के (द्युम्न) = [ energy, strength, power] बल को (अधि) = आधिक्येन (धा:) = हमारे में स्थापित कर । सोमरक्षण से हमारा शरीर अंग-प्रत्यंग में बलवाला, सुदृढ़ बनाता है। [३] हे सोम ! तू (पृत्सु) = काम-क्रोध आदि के साथ चलनेवाले अध्यात्म संग्रामों में (नः) = हमारे लिये (सहः) = शत्रुओं को कुचलने की शक्ति को [धा:] धारण कर। इस सोमरक्षण के द्वारा जैसे हम शारीरिक रोगों पर विजय पायें, उसी प्रकार मानस विकारों को भी हम पराभूत करनेवाले हों ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से [क] योगमार्ग में प्रगति होकर हमें आनन्द का लाभ होता है, [ख] शरीर का बल बढ़ता है, [ग] काम-क्रोध आदि शत्रुओं पर हम विजय पानेवाले होते हैं ।
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! (दिवः) द्युलोकात् (वृष्टिम्, परिस्रव) वृष्टिं परिक्षर तथा च (द्युम्नम्) अन्नाद्यैश्वर्य्यं सम्पादय तथा च (पृथिव्याः अधि) सर्वत्र पृथिवीमध्ये (नः) अस्मभ्यम् (सहः) बलं दत्त्वा (पृत्सु, धाः) युद्धेषु जापय ॥८॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, shower the lights of heaven and wealth, power and glory over the earth. Give us courage, patience and fortitude, hold on to us in battles of life and give us the final victory.
