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अ॒स्मभ्यं॑ रोदसी र॒यिं मध्वो॒ वाज॑स्य सा॒तये॑ । श्रवो॒ वसू॑नि॒ सं जि॑तम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
asmabhyaṁ rodasī rayim madhvo vājasya sātaye | śravo vasūni saṁ jitam ||
पद पाठ
अ॒स्मभ्य॑म् । रो॒द॒सी॒ इति॑ । र॒यिम् । मध्वः॑ । वाज॑स्य । सा॒तये॑ । श्रवः॑ । वसू॑नि । सम् । जि॒त॒म् ॥ ९.७.९
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ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:7» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:29» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:9
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (रोदसी) द्युलोक और पृथिवीलोक के मध्य में (मध्वः वाजस्य) बड़े बल की (सातये) प्राप्ति के लिये (रयिम्) धन (श्रवः) ऐश्वर्य (वसूनि) रत्न (सञ्जितम्) हमको आप दें ॥९॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा जब प्रसन्न होता है तो नाना प्रकार की विभूतियों का प्रदान करता है, क्योंकि जो विभूतियें हैं, वे सब परमात्मा का ऐश्वर्य हैं, जैसा कि “यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा। तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंशसंभवम्” गीता। अर्थात् जो कुछ विभूतिवाली या शोभावाली या बलवाली वस्तु है, वह सब परमात्मा के ऐश्वर्य की सूचक है ॥९॥ यह सातवाँ सूक्त और उनतीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥७॥२९॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वाज - श्रवस्-वसु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (रोदसी) = द्यावापृथिवी (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (वाजस्य सातये) = शक्ति के लाभ के लिये (मध्वः रयिम्) = सोम के धन को, सोमरूप धन को (संजितम्) = जीतनेवाले हों । सारा वातावरण हमारे लिये इस बात की अनुकूलता को पैदा करे कि हम सोमरूप धन को प्राप्त करके शक्तिशाली बनें। [२] इस मधु के रयि [सोम-धन] को प्राप्त कराके ये द्यावापृथिवी हमारे लिये (श्रवः) = ज्ञान को तथा (वसूनि) = निवास के लिये आवश्यक सब तत्त्वों को जीतनेवाले हों। सोमरक्षण से हमारा ज्ञान बढ़े और हमें सब वसुओं की प्राप्ति हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से हमें [क] शक्ति प्राप्त हो, [ख] हमारा ज्ञान बढ़े तथा [ग] सब वसुओं की हमें प्राप्ति हो । अगले सूक्त के भी ऋषि देवता यही हैं। वहाँ ' असित' कहता है-
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (रोदसी) द्यावापृथिव्योर्मध्ये (मध्वः वाजस्य) महतो बलस्य (सातये) प्राप्तये (रयिम्) धनम् (श्रवः) ऐश्वर्यम् (वसूनि) रत्नानि च (सञ्जितम्) प्रयच्छतु मह्यम् ॥९॥ इति सप्तमं सूक्तमेकोनत्रिंशत्तमो वर्गश्च समाप्तः ॥७॥२९॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - May heaven and earth lead us to acquisition of wealth, sweet homes, honour, excellence and fame for winning the higher victories of life.
