आ मि॒त्रावरु॑णा॒ भगं॒ मध्व॑: पवन्त ऊ॒र्मय॑: । वि॒दा॒ना अ॑स्य॒ शक्म॑भिः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ā mitrāvaruṇā bhagam madhvaḥ pavanta ūrmayaḥ | vidānā asya śakmabhiḥ ||
पद पाठ
आ । मि॒त्रावरु॑णा । भग॑म् । मध्वः॑ । प॒व॒न्ते॒ । ऊ॒र्मयः॑ । वि॒दा॒नाः । अ॒स्य॒ । शक्म॑ऽभिः ॥ ९.७.८
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:7» मन्त्र:8
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:29» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:8
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - जिन विद्वानों की (मध्वः ऊर्मयः) मीठी वृत्तियें (भगम्) ईश्वर के ऐश्वर्य की ओर लगती हैं तथा (मित्रावरुणा) ईश्वर के प्रेम और आकर्षणरूप शक्ति की ओर लगती हैं, वे (विदाना) विज्ञानी (अस्य शक्मभिः) इस परमात्मा के आनन्द से (आपवन्ते) सम्पूर्ण संसार को पवित्र करते हैं ॥८॥
भावार्थभाषाः - ईश्वरपरायण लोग केवल अपने आपका ही उद्धार नहीं करते, किन्तु अपने भावों से सम्पूर्ण संसार का उद्धार करते हैं ॥८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'मित्र, वरुण व भग' बनना
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (मध्वः) = ओषधियों के सारभूत सोम की (ऊर्मयः) = तरंगें (मित्रावरुणा) = मित्र - वरुण को (भगम्) = और भग को (आपवन्ते) = सर्वथा प्राप्त होती हैं। सब के साथ स्नेह करनेवाला 'मित्र' है, 'ईर्ष्या-द्वेष-क्रोध' न करनेवाला। अपने को पाप से निवृत्त करनेवाला 'वरुण' है । यह अशुभ कर्मों का अपने से निवारण करता है। 'भज सेवायाम्' से बना हुआ 'भग' शब्द उपासक का वाचक है । ये 'मित्र, वरुण व भग' ही अपने में सोम का रक्षण कर पाते हैं । [२] ये मित्र, वरुण और भग (अस्य) = इस सोम की (शक्मभिः) = शक्तियों से (विदाना:) = उस प्रभु के ज्ञानवाले बनते हैं, रक्षित सोम बुद्धि को तीव्र करता है, तीव्र बुद्धि से प्रभु का दर्शन होता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - 'मित्र, वरुण व भग' बनकर हम सोम का रक्षण करें। रक्षित सोम हमें तीव्र बुद्धि बनाकर प्रभु-दर्शन के योग्य बनायेगा ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - येषां विदुषाम् (मध्वः ऊर्मयः) मधुरवृत्तयः (भगम्) ईश्वरैश्वर्यमभि प्रवर्तन्ते तथा (मित्रावरुणा) ईश्वरस्य प्रेमाकर्षणशक्तिमभि च प्रवर्त्तन्ते ते (विदाना) विद्वांसः (अस्य शक्मभिः) परमात्मानन्दैः (आपवन्ते) कृत्स्नं जगत्पुनन्ति ॥८॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Those wise sages of knowledge, whose sweet will and loving emotions abide by divine love and friendship, freedom and justice, and excellence and generosity, live happy and prosperous in a state of vibrancy like waves of sparkling streams, by the love and exhilaration of Soma, spirit of peace and purity.
