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स वा॒युमिन्द्र॑म॒श्विना॑ सा॒कं मदे॑न गच्छति । रणा॒ यो अ॑स्य॒ धर्म॑भिः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa vāyum indram aśvinā sākam madena gacchati | raṇā yo asya dharmabhiḥ ||
पद पाठ
सः । वा॒युम् । इन्द्र॑म् । अ॒श्विना॑ । सा॒कम् । मदे॑न । ग॒च्छ॒ति॒ । रण॑ । यः । अ॒स्य॒ । धर्म॑ऽभिः ॥ ९.७.७
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ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:7» मन्त्र:7
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:29» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:7
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो पुरुष (अस्य धर्मभिः) इस परमात्मा के धर्मों को धारण करता हुआ (रणा) रमण करता है (सः) वह (वायुम्) ज्ञानी यज्ञकर्मा पुरुष के और (वायुम्) ऐश्वर्यवाले पुरुष के (अश्विना) ज्ञानयोगी और कर्मयोगी पुरुष के (साकम्) साथ (मदेन) अभिमान से (गच्छति) चल सकता है ॥७॥
भावार्थभाषाः - जो पुरुष परमात्मा के अपहतपाप्मादि धर्मों को धारण करता है, वह ज्ञानी विज्ञानी आदिकों की सब पदवियों को प्राप्त होता है अर्थात् अभिमान के साथ ज्ञानी विज्ञानी विद्वानों के मद को मर्दन कर सकता है ॥७॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वायु- इन्द्र- अश्विना की प्राप्ति
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यः) = जो व्यक्ति (अस्य) = इस सोम के (धर्मभिः) = धारणों के द्वारा (रणा) = जीवन में आनन्द का अनुभव करता है, अर्थात् जो सोमरक्षणों में ही आनन्द को मानता है, (सः) = वह (मदेन साकम्) = जीवन के उल्लास के साथ (वायुम्) = वायु को, (इन्द्रम्) = इन्द्र को, (अश्विना) = अश्विनी देवों को (गच्छति) = प्राप्त होता है। [२] सोमरक्षण से जीवन में आनन्द का अनुभव होता है। यह सोमरक्षक वायु को प्राप्त करता है, अर्थात् वायु की तरह सतत क्रियाशील होता है । इन्द्र को प्राप्त होता है, देवराट् बनता है, सब आसुरवृत्तियों का संहार करनेवाला होता है। अश्विनीदेवों को प्राप्त करता है, अपनी प्राणापान शक्ति को बढ़ानेवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से [क] गतिशीलता प्राप्त होती है, [ख] हम सब आसुर वृत्तियों का संहार कर पाते हैं, [ग] प्राणापान शक्ति बढ़ती है ।
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (यः) यः पुरुषः (अस्य धर्मभिः) अस्य परमात्मनः धर्मैः सह वर्त्तमानः (रणा) रमते (सः) स मनुष्यः (वायुम्) ज्ञानिना (इन्द्रम्) ऐश्वर्यवता (अश्विना) ज्ञानयोगकर्मयोगिभ्यां च (साकम्) सह (मदेन) गर्वेण (गच्छति) याति ॥७॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - He who happily abides by the laws of this Soma, spirit of vibrant purity, goes forward in life with powers of ruling strength and excellence and sagely people of noble knowledge and unfailing action.
