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ग्राव्णा॑ तु॒न्नो अ॒भिष्टु॑तः प॒वित्रं॑ सोम गच्छसि । दध॑त्स्तो॒त्रे सु॒वीर्य॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

grāvṇā tunno abhiṣṭutaḥ pavitraṁ soma gacchasi | dadhat stotre suvīryam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ग्राव्णा॑ । तु॒न्नः । अ॒भिऽस्तु॑तः । प॒वित्र॑म् । सो॒म॒ । ग॒च्छ॒सि॒ । दध॑त् । स्तो॒त्रे । सु॒ऽवीर्य॑म् ॥ ९.६७.१९

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:67» मन्त्र:19 | अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:16» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:19


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ग्राव्णा) जिज्ञासुओं से (तुन्नः) आविर्भाव को प्राप्त हुए तथा (अभिष्टुतः) सब प्रकार से स्तुति किये हुए (सोम) हे परमात्मन् ! आप (पवित्रम्) उनके पवित्र अन्तःकरण को (गच्छसि) प्राप्त होते हैं और (स्तोत्रे) उक्त स्तोता लोगों के लिए आप (सुवीर्यम्) सुन्दर बल को (दधत्) उत्पन्न करते हैं ॥१९॥
भावार्थभाषाः - उपासक लोगों से उपासना किया हुआ परमात्मा उनके लिए सुन्दर बल का प्रदान करता है ॥१९॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

तुन्नः अभिष्टुतः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! (ग्राव्णा) = स्तोता से (तुन्नः) [guided = प्रेरित] = प्रेरित किया गया, शरीर के अन्दर ही व्याप्त किया गया तथा (अभिष्टुतः) = प्रातः - सायं स्तुति किया गया तू (पवित्रम्) = इस पवित्र हृदयवाले पुरुष को, इस स्तोता को गच्छसि प्राप्त होता है । [२] इस स्तोता को प्राप्त होने पर (स्तोत्रे) = इस स्तोता के लिये (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (दधत्) = तू धारण करता है । सोम का स्तवन करने से सोम के गुणों का सतत स्मरण होता है इस स्तवन से सोमरक्षण में नीति उत्पन्न होती है । हमारी सब क्रियायें सोमरक्षण के उद्देश्य से होती हैं। सुरक्षित सोम हमारी शक्ति का वर्धन करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम का स्तवन करनेवाला व्यक्ति सोम को शरीर में प्रेरित करता हुआ शक्ति- सम्पन्न बनता है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ग्राव्णा) जिज्ञासुभिः (तुन्नः) आविर्भूतस्तथा (अभिष्टुतः) सर्वथा स्तुतः (सोम) हे जगदीश ! भवान् (पवित्रम्) पूर्वोक्तानां कर्मयोगिनामन्तःकरणानि (गच्छसि) प्राप्नोति। अथ च (स्तोत्रे) उक्तस्तोतृभ्यस्त्वं (सुवीर्यम्) सुबलम् (दधत्) उत्पादयसि ॥१९॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Invoked and adored by the celebrant, O Soma, you move and arise in the pure heart of the devotee bearing creative vision for the celebrant and vesting vigour and power in the song.