वा॒चो ज॒न्तुः क॑वी॒नां पव॑स्व सोम॒ धार॑या । दे॒वेषु॑ रत्न॒धा अ॑सि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
vāco jantuḥ kavīnām pavasva soma dhārayā | deveṣu ratnadhā asi ||
पद पाठ
वा॒चः । ज॒न्तुः । क॒वी॒नाम् । पव॑स्व । सो॒म॒ । धार॑या । दे॒वेषु॑ । र॒त्न॒ऽधाः । अ॒सि॒ ॥ ९.६७.१३
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:67» मन्त्र:13
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:15» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:13
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! (कवीनां) कवियों के मध्य में आप (वाचोजन्तुः) वेदवाणियों के उत्पादक हैं और (देवेषु) विद्वानों को (रत्नधा असि) विद्यारूप रत्न धारण कराते हैं। ऐसे आप (धारया) अपनी सुधामयी वृष्टि से (पवस्व) पवित्र करिए ॥१३॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ही वस्तुतः आदिकवि है। उसकी कवित्व शक्ति का अनुकरण करके अन्य कवियों ने अपने-अपने भावों को प्रकट किया है ॥१३॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वाचो जन्तु - रत्नधा
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू ही (कवीनाम्) = क्रान्तप्रज्ञ मेधावी पुरुषों की (वाचः) = ज्ञानवाणियों का (जन्तुः) = जन्म देनेवाला है, तू ही उन्हें ज्ञान प्राप्त कराता है। हे सोम ! तू (धारया) = अपनी धारणशक्ति के साथ (पवस्व) = हमें प्राप्त हो । [२] हे सोम ! तू ही (देवेषु) = दिव्य गुणवाले पुरुषों में (रत्नधा असि) = सब रमणीयताओं का धारण करनेवाला है। सब रत्नों को यह सोम ही जन्म देता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - यह सोम शरीर में सुरक्षित होकर ज्ञान की वाणियों को जन्म देना है तथा सब रत्नों का हमारे में धारण करता है ।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे जगदीश ! (कवीनाम्) कविवराणां मध्ये त्वं (वाचोजन्तुः) वेदवाणीजनकोऽसि। अथ च (देवेषु) विद्वद्भ्यः (रत्नधा असि) विद्यारत्नं धारयसि। एवम्भूतस्त्वं (धारया) स्वकीयसुधामय्या वृष्ट्या (पवस्व) पुनीहि ॥१३॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, you are the creator, originator and inspirer of the voice of poets. Flow free and abundant in streams and showers of revelation for the poets. You are the sole treasure and harbinger of the jewels of vision into the heart and soul of the poets of divinity.
