अग्न॒ आयूं॑षि पवस॒ आ सु॒वोर्ज॒मिषं॑ च नः । आ॒रे बा॑धस्व दु॒च्छुना॑म् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
agna āyūṁṣi pavasa ā suvorjam iṣaṁ ca naḥ | āre bādhasva ducchunām ||
पद पाठ
अग्ने॑ । आयूं॑षि । प॒व॒से॒ । आ । सु॒व॒ । ऊर्ज॑म् । इष॑म् । च॒ । नः॒ । आ॒रे । बा॒ध॒स्व॒ । दु॒च्छुना॑म् ॥ ९.६६.१९
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:66» मन्त्र:19
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:10» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:19
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! आप (आयूंषि) हमारी आयु को (पवसे) पवित्र करते हैं (च) और (नः) हमारे लिए (इषम्) ऐश्वर्य और (ऊर्जम्) बल (आसुव) दें। तथा (दुच्छुनाम्) विघ्नकारी राक्षसों को हमसे (आरे) दूर (बाधस्व) करें ॥१९॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा ने विघ्नकारी राक्षसों से बचने का उपदेश किया है कि हे पुरुषों ! तुम विघ्नकारी अवैदिक पुरुष जो राक्षस हैं, उनके हटाने में सदैव तत्पर रहो ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
पवित्र प्रभु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन्! आप ही (आयूंषि) = हमारे जीवनों को (पवसे) = पवित्र करते हैं । (च) = और आप (नः) = हमारे लिये (ऊर्जम्) = बल व प्राणशक्ति को तथा (इषम्) = प्रेरणा को (आसुव) = प्राप्त करायें आप से कर्त्तव्य की प्रेरणा व बल को प्राप्त करके हम मार्ग पर आगे बढ़ें। [२] आप सब (दुच्छुनाम्) = दुर्गतियों व दुःखों को (आरे) = दूर (वाधस्व) = बाधित करिये, पीड़ित करिये। हमारे से सब दुःख व दुराचरण दूर हों ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु का उपासन ही हमारे जीवनों से सब दुर्गुणों को दूर करता है ।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ! त्वम् (आयूंषि) अस्माकं वयांसि (पवसे) पवित्रयसि (च) अथ च (नः) अस्मभ्यम् (इषम्) ऐश्वर्यं तथा (ऊर्जम्) बलं (आसुव) देहि। तथा (दुच्छुनाम्) विघ्नकारिराक्षसान् इतः (आरे बाधस्व) दूरीकुरु ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, heat and energy of life divine, give us good health and long age with purity, create and bring us food, energy and excellence, and throw off and keep away all evils and negativities from us.
