य उ॒ग्रेभ्य॑श्चि॒दोजी॑या॒ञ्छूरे॑भ्यश्चि॒च्छूर॑तरः । भू॒रि॒दाभ्य॑श्चि॒न्मंही॑यान् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ya ugrebhyaś cid ojīyāñ chūrebhyaś cic chūrataraḥ | bhūridābhyaś cin maṁhīyān ||
पद पाठ
यः । उ॒ग्रेभ्यः॑ । चि॒त् । ओजी॑यान् । शूरे॑भ्यः । चि॒त् । शूर॑ऽतरः । भू॒रि॒ऽदाभ्यः॑ । चि॒त् । मंही॑यान् ॥ ९.६६.१७
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:66» मन्त्र:17
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:10» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:17
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो परमात्मा (शूरेभ्यः) शूरवीरों से (शूरतरः) अत्यन्त शूरवीर है (चित्) और (भूरिदाभ्यः) अत्यन्त दानशीलों से (मंहीयान्) अत्यन्त दानशील है (चित्) और (उग्रेभ्यः) जो अत्यन्त बलवाले हैं, उनसे (ओजीयान्) अत्यन्त बलवाला है, ऐसे परमात्मा की हम उपासना करते हैं ॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में यह वर्णन किया है कि परमात्मा अजर अमर तथा अविनाशी है। जैसा कि “तेजोऽसि तेजो मयि धेहि। वीर्यमसि वीर्यं मयि धेहि। बलमसि बलं मयि धेहि” इत्यादि मन्त्रों में परमात्मा को बलस्वरूप कथन किया गया है। इसी प्रकार इस मन्त्र में भी परमात्मा को बलस्वरूपवाला कथन किया गया है ॥१७॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
ओजीयान्-क्षूरतर-मंहीयान्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यः) = जो सोम (उग्रेभ्यः) = शत्रुओं के विध्वंसक बलवालों से (चित्) = भी (ओजीयान्) = अधिक ओजस्वी है और (चित्) = निश्चय से (शूरेभ्यः शूरतर:) = सर्वाधिक शूर है, हिंसक है। सुरक्षित हुआ- हुआ सोम ही शरीर के अन्दर आ जानेवाले रोगकृमियों का संहारक है तथा मन को ओजस्वी बनाता है । [२] शरीर व मन दोनों का स्वस्थ बनाकर यह सोम (चित्) = निश्चय से (भूरि-दाभ्यः) = खूब देनेवालों से भी (महीयान्) = अधिक देनेवाला है। यह सोम दातृतम है। शरीर की नीरोगता को तथा मन की निर्मलता को देकर यह बुद्धि की तीव्रता को देनेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - यह सोम 'ओजस्वी- शूर व सब उत्तम वसुओं का दाता' है ।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (यः) यः परमेश्वरः (शूरेभ्यः) वीरेभ्यः (शूरतरः) ततोऽप्यधिकवीरोऽस्ति (चित्) अथ च (भूरिदाभ्यः) दानवीरेषु (मंहीयान्) दानवीरतरोऽस्ति (चित्) अथ च (उग्रेभ्यः) महाबलेषु (ओजीयान्) बलिष्ठः एवम्भूतं त्वां वयमुपास्महे ॥१७॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - You are mightier than the mighty, braver than the brave, more generous than the generous, whoever they be.
