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इषं॑ तो॒काय॑ नो॒ दध॑द॒स्मभ्यं॑ सोम वि॒श्वत॑: । आ प॑वस्व सह॒स्रिण॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

iṣaṁ tokāya no dadhad asmabhyaṁ soma viśvataḥ | ā pavasva sahasriṇam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इष॑म् । तो॒काय॑ । नः॒ । दध॑त् । अ॒स्मभ्य॑म् । सो॒म॒ । वि॒श्वतः॑ । आ । प॒व॒स्व॒ । स॒ह॒स्रिण॑म् ॥ ९.६५.२१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:65» मन्त्र:21 | अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:5» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:21


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! आप (नः) हमारे (तोकाय) सन्तानों के लिये (सहस्रिणं) अनन्त प्रकार के धन (विश्वतः) सब ओर से (दधत्) धारण कराएँ और (अस्मभ्यं) हमको सब प्रकार का ऐश्वर्य दें तथा (आ पवस्व) सब प्रकार से पवित्र करें ॥२१॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा से अभ्युदयप्राप्ति की प्रार्थना की गई है ॥२१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सात्त्विक अन्न, सुपथार्जित धन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते! (नः तोकाय) = हमारे सन्तानों के लिये भी (इषम्) = उत्तम अन्नों को (दधत्) = धारण करता हुआ तू (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (विश्वतः) = सब दृष्टिकोणों से (सहस्त्रिणम्) = [स हस्] प्रसन्नता परिपूर्ण धन को (आपवस्व) = प्राप्त करा । [२] शरीर में संयत सोम से समय पर उत्पन्न हुए हुए सन्तान भी सदा उत्तम भावोंवाले होते हैं, वे उत्तम अन्नों के सेवन की ही कामना करते हैं। इस सोम के रक्षण से हम भी उन ऐश्वर्यों को कमानेवाले बनें, जो कि हमारे आनन्द की वृद्धि का कारण हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम सात्त्विक विचारोंवाले सन्तानों को जन्म देता है। हम सोमरक्षण से सत्य से धनों को कमाते हुए आनन्द-लाभ करते हैं ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे जगदीश ! भवान् (नः तोकाय) अस्मत्सन्तानेभ्यः (सहस्रिणं) बहुविधधनानि (विश्वतः) परितः (दधत्) धारयतु। अथ च (अस्मभ्यं) मां (इषं) सर्वविधैश्वर्यं ददातु तथा (आ पवस्व) सर्वथा पवित्रयतु ॥२१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, bearing a thousandfold gifts of food, energy, knowledge and will of initiative and assertion from all sides of the world, pray flow to bless us and our future generations with the power and peace of divinity.