असृ॑क्षत॒ प्र वा॒जिनो॑ ग॒व्या सोमा॑सो अश्व॒या । शु॒क्रासो॑ वीर॒याशव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
asṛkṣata pra vājino gavyā somāso aśvayā | śukrāso vīrayāśavaḥ ||
पद पाठ
असृ॑क्षत । प्र । वा॒जिनः॑ । ग॒व्या । सोमा॑सः । अ॒श्व॒ऽया । शु॒क्रासः॑ । वी॒र॒ऽया । आ॒शवः॑ ॥ ९.६४.४
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:64» मन्त्र:4
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:36» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:4
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोमासः) सौम्य स्वभाववाला (वाजिनः) बलरूप (अश्वया) गतिशील तथा (गव्या) प्रकाशस्वरूप (शुक्रासः) ज्ञानस्वरूप (वीरया) वीरों को उत्पन्न करनेवाले (आशवः) गतिशील परमात्मा को उपासक लोग (प्रासृक्षत) अपना उपास्य बनाते हैं ॥४॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे मनुष्यों ! तुम लोग उक्त गुणसम्पन्न परमात्मा को अपना उपास्य बनाओ ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गव्या-अश्वया-वीरया
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (प्र वाजिन:) = प्रकृष्ट शक्ति के कारणभूत, (शुक्रासः) = ज्ञानदीप्ति को उत्पन्न करनेवाले (आशवः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाले (सोमासः) = सोमकण (असृक्षत) = उत्पन्न किये जाते हैं । [२] ये सोमकण (गव्या) = उत्तम ज्ञानेन्द्रियों की कामना से (अश्वया) = उत्तम कर्मेन्द्रियों की कामना से तथा (वीरया) = उत्तम सन्तानों व वीरत्व की कामना से उत्पन्न किये जाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमें शक्ति, ज्ञानदीप्ति व स्फूर्ति को प्राप्त करानेवाले हैं। इनके रक्षण से उत्तम ज्ञानेन्द्रियों, उत्तम कर्मेन्द्रियों तथा वीर सन्तानों की प्राप्ति होती है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोमासः) सौम्यस्वभाववान् (वाजिनः) बलरूपः (अश्वया) गतिशीलस्तथा (गव्या) प्रकाशरूपः (शुक्रासः) ज्ञानस्वरूपः (वीरया) वीरोत्पादकः पुरुषः (आशवः) गतिशीलं परमात्मानमुपासकाः (प्रासृक्षत) उपासते ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Vibrant heroes blest with the soma spirit of peace, progress and brilliance, pure and potent, inspired with ambition for lands, cows and culture, horses, advancement and achievement, and advancement of the brave generations of humanity move forward with the spirit of generous creativity.
