अयु॑क्त॒ सूर॒ एत॑शं॒ पव॑मानो म॒नावधि॑ । अ॒न्तरि॑क्षेण॒ यात॑वे ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ayukta sūra etaśam pavamāno manāv adhi | antarikṣeṇa yātave ||
पद पाठ
अयु॑क्त । सूरः॑ । एत॑शम् । पव॑मानः । म॒नौ । अधि॑ । अ॒न्तरि॑क्षेण । यात॑वे ॥ ९.६३.८
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:8
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:31» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:8
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला परमात्मा (मनावधि) जो मनुष्यमात्र का स्वामी है, वह (अन्तरिक्षेण) अन्तरिक्षमार्ग द्वारा (यातवे) जाने के लिये (सूरः) जो अन्तरिक्षमार्ग से गमन करता है, (एतशं) ऐसे शक्तिसम्पन्न सूर्य को (अयुक्त) जोड़ता है ॥८॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ने अपने सामर्थ्य से अनन्त शक्ति उत्पन्न की हैं ॥८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अन्तरिक्ष से जाना
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (पवमानः) = हमारे जीवनों को पवित्र करता हुआ यह सोम (मनौ अधि) = विचारशील पुरुष में (सूरः) = सूर्य के (एतशम्) = अश्व को अयुक्त - जोतता है। सूर्य के अश्व को युक्त करने का भाव यही है कि हमारे जीवन में यह सोम ज्ञान के सूर्य को उदित करता है। [२] यह उदित हुआ- हुआ ज्ञान का सूर्य (अन्तरिक्षेण) = अन्तरिक्ष मार्ग से (यातवे) = जाने के लिये होता है। सोमरक्षण से जब हमें ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है, तो हम सदा मध्यमार्ग से चलनेवाले बनते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें ज्ञान प्राप्त कराके मध्यमार्ग में चलनेवाला बनाता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवमानः) सर्वपावकः परमात्मा (मनावधि) यः खलु नराधिपोऽस्ति स ईश्वरः (अन्तरिक्षेण) अविज्ञेयमार्गेण (यातवे) गन्तुं (सूरः) सरतीति सूरः योऽन्तरिक्षेण मार्गेण गतिं करोति (एतशम्) एतादृशशक्तिविशेषं सूर्यं (अयुक्त) योजयति ॥८॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - The light of the world, pure, radiant and inspiring over man and mind, joins the man of super fast intelligence and inspires him to rise and fly over paths of the skies.
