वांछित मन्त्र चुनें

अ॒प॒घ्नन्त्सो॑म र॒क्षसो॒ऽभ्य॑र्ष॒ कनि॑क्रदत् । द्यु॒मन्तं॒ शुष्म॑मुत्त॒मम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

apaghnan soma rakṣaso bhy arṣa kanikradat | dyumantaṁ śuṣmam uttamam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒प॒ऽघ्नन् । सो॒म॒ । र॒क्षशः॑ । अ॒भि । आ॒र्ष॒ । कनि॑क्रदत् । द्यु॒ऽमन्त॑म् । शुष्म॑म् । उ॒त्ऽत॒मम् ॥ ९.६३.२९

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:29 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:35» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:29


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यगुण सम्पन्न विद्वन् ! आप (रक्षसः) राक्षसों का (अपघ्नन्) नाश करते हुए (कनिक्रदत्) और शूरवीरता का उपदेश करते हुए (उत्तमं) उत्तम (द्युमन्तं) दीप्तिवाला (शुष्मम्) बल (अभ्यर्ष) हमको दें ॥२९॥
भावार्थभाषाः - जिस देश में सौम्यस्वभावयुक्त शूरवीर उत्पन्न होते हैं, उस देश में सर्वोपरि बल और ऐश्वर्य उत्पन्न होता है। तात्पर्य यह है कि ऐश्वर्य उत्पन्न करने के लिये धीरवीरतादि गुणों का धारण करना अत्यावश्यक है ॥२९॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

द्युमान् शुष्म [गोमान् वाज]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते! (रक्षसः) = राक्षसीभावों व रोगकृमिरूप राक्षसों को (अपघ्नन्) = सुदूर विनष्ट करता हुआ तू (अभ्यर्ष) = हमें प्राप्त हो। (कनिक्रदत्) = हमारे अन्दर स्थित हुआ हुआ तू प्रभु के गुणों का उच्चारण करनेवाला बन । [२] तू (द्युमन्तम्) = ज्योतिर्मय (शुष्मम्) = बल को (आभर) = हमारे में भर । तेरे रक्षण से हमें ज्योति व शक्ति की प्राप्ति हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम रोगकृमियों को नष्ट करे, हमें प्रभु-स्तवन में प्रवृत्त करे, हमारे लिये ज्योतिर्मय शक्ति को प्राप्त करानेवाला हो ।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यस्वभाव ! भवान् (रक्षसः) राक्षसानां (अपघ्नन्) नाशं कुर्वन् (कनिक्रदत्) तथा शूरताया उपदेशं कुर्वन् (उत्तमम्) सर्वोत्कृष्टं (द्युमन्तम्) दीप्तिमन्तं (शुष्मम्) बलं (अभ्यर्ष) अस्मभ्यं ददातु ॥२९॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, spirit of creative peace and prosperity, dispelling and eliminating negative and destructive forces, roaring with success of positive progress, let streams of peace and prosperity flow full with highest strength, sweetness and light.