अ॒प॒घ्नन्प॑वसे॒ मृध॑: क्रतु॒वित्सो॑म मत्स॒रः । नु॒दस्वादे॑वयुं॒ जन॑म् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
apaghnan pavase mṛdhaḥ kratuvit soma matsaraḥ | nudasvādevayuṁ janam ||
पद पाठ
अ॒प॒ऽघ्नन् । पा॒व॒से॒ । मृधः॑ । क्र॒तु॒ऽवित् । सो॒म॒ । म॒त्स॒रः । नु॒दस्व॑ । अदे॑वऽयुम् । जन॑म् ॥ ९.६३.२४
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:24
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:34» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:24
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमेश्वर ! आप (मत्सरः) परम आनन्द देनेवाले तथा (क्रतुवित्) सर्वशक्तिसम्पन्न हैं। जो आप (मृधः) दुष्टों को (अपघ्नन्) हनन करते हुए (पवसे) रक्षा करते हैं, वह आप (अदेवयुम्) दुष्टाचारी (जनम्) राक्षससमूह को (नुदस्व) हनन करिये ॥२४॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में भी परमात्मा के रौद्ररूप का वर्णन किया गया है ॥२४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'क्रतुवित्' सोम
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (मृधः) = हमें कतल करने वाले 'काम-क्रोध-लोभ' आदि शत्रुओं को (अपघ्नन्) = सुदूर विनष्ट करता हुआ (पवसे) = हमें प्राप्त होता है। हे सोम ! तू इन शत्रुओं को नष्ट करके (क्रतुवित्) = हमें शक्ति व प्रज्ञान को प्राप्त करानेवाला है। (मत्सरः) = इस शक्ति व प्रज्ञान के द्वारा हमारे जीवन में आनन्द का संचार करनेवाला है। [२] हे सोम ! तू (अदेवयुं जनम्) = उस देव प्रभु को न चाहनेवाले पुरुष को नुदस्व हमारे से दूर प्रेरित कर अर्थात् हमारी अदेवयु पुरुषों के संग में उठने-बैठने की कामना न हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमारे शत्रुओं का नाश करता है। हमें शक्ति व आनन्द को प्राप्त कराता है । हमारी रुचि सज्जन संग की होती है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे जगदीश्वर ! भवान् (मत्सरः) परमानन्ददाता तथा (क्रतुवित्) सर्वशक्तिसम्पन्नोऽस्ति। यो भवान् (मृधः) दुष्टान् (अपघ्नन्) नाशयन् शिष्टान् (पवसे) गोपायति स त्वं (अदेवयुम्) दुराचारिणं (जनम्) रक्षःसमूहं (नुदस्व) नाशयतु ॥२४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, lord of absolute peace, purity, power and holiness of action, omnipotent and blissful, you vibrate in existence destroying sin and evil. Pray impel the impious people to truth, piety and creative generosity, or punish and eliminate them like hurdles in the creative paths of piety and rectitude.
