अ॒भ्य॑र्ष सह॒स्रिणं॑ र॒यिं गोम॑न्तम॒श्विन॑म् । अ॒भि वाज॑मु॒त श्रव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
abhy arṣa sahasriṇaṁ rayiṁ gomantam aśvinam | abhi vājam uta śravaḥ ||
पद पाठ
अ॒भि । अ॒र्ष॒ । स॒ह॒स्रिण॑म् । र॒यिम् । गोऽम॑न्तम् । अ॒श्विन॑म् । अ॒भि । वाज॑म् । उ॒त । श्रवः॑ ॥ ९.६३.१२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:12
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:32» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:12
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! आप (सहस्रिणम् रयिम्) अनन्त प्रकार के धनों को जो (गोमत्) अनेक प्रकार की भूमि-हिरण्यादियुक्त हैं तथा (अश्विनम्) जो विविध यानों से परिपूर्ण हैं और जो (वाजम्) बलरूप (उत) और (श्रवः) यशोरूप हैं, उनको (अभ्यर्ष) आप हमको दें ॥१२॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा ने अनन्त प्रकार के धनों की उपलब्धि का उपदेश किया है ॥१२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सब कोशों का ऐश्वर्य
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! तू (रयिम्) = उस ऐश्वर्य को (अभि अर्ष) = हमें प्राप्त करा, जो कि (सहस्रिणम्) = [सहस्] सदा आनन्द से युक्त है, 'सहस्' वाला है। यही तो आनन्दमय कोश का ऐश्वर्य है 'सहोसि सहो मयि धेहि' । [२] उस ऐश्वर्य को प्राप्त करा जो कि (गोमन्तम्) = प्रशस्त ज्ञानेन्द्रियोंवाला है तथा (अश्विनम्) = प्रशस्त कर्मेन्द्रियोंवाला है । यही ऐश्वर्य प्राणमयकोश का है 'प्राणाः वाव इन्द्रियाणि' । [३] हे सोम ! तू हमें (वाजं अभि) = बल की ओर ले चल । यह बल ही मनोमयकोश का ऐश्वर्य है 'बलमसि बलं मयि धेहि' । (उत) = और (श्रवः) = ज्ञान की ओर तू हमें ले चल । हमारे विज्ञानमयकोश को ज्ञानैश्वर्य से तू परिपूर्ण कर ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें आनन्द, उत्तम इन्द्रियाँ, शक्ति व ज्ञान को प्राप्त करानेवाला हो ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे जगदीश्वर ! भवान् (सहस्रिणं रयिम्) बहुविधानि धनानि यानि (गोमन्तम्) भूमिहिरण्यादियुतानि तथा (अश्विनम्) नानाविधवाहनपरिपूर्णानि अथ च (वाजम्) बलयुक्तानि (उत) अथ च (श्रवः) यशोरूपाणि तानि (अभ्यर्ष) अस्मभ्यं ददातु ॥१२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Let flow to us a thousandfold wealth of lands and cows, arts and culture, horses and progressive achievements. Bring us also speed, energy, and victorious success, and undying fame and excellence.
