पव॑मान वि॒दा र॒यिम॒स्मभ्यं॑ सोम दु॒ष्टर॑म् । यो दू॒णाशो॑ वनुष्य॒ता ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pavamāna vidā rayim asmabhyaṁ soma duṣṭaram | yo dūṇāśo vanuṣyatā ||
पद पाठ
पव॑मान । वि॒दाः । र॒यिम् । अ॒स्मभ्य॑म् । सो॒म॒ । दु॒स्तर॑म् । यः । दुः॒ऽनशः॑ । व॒नु॒ष्य॒ता ॥ ९.६३.११
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:11
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:32» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:11
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (सोम) हे सौम्यस्वभाव ! (अस्मभ्यं) हमारे लिये उस (रयिम्) धन को (विदाः) दें, (यः) जो (वनुष्यता) शत्रुओं से (दूणाशः) अजेय है (दुष्टरम्) और अप्राप्य है ॥११॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा ने उस अलभ्य लाभ का उपदेश किया है, जो ज्ञान-विज्ञानरूपी धन है। ज्ञान-विज्ञानरूप धन को कोई पुरुष बलात्कार से छीन वा चुरा नहीं सकता, इसीलिये कहा है कि हे वेदानुयायियों ! आप उक्त धन का संचय करें ॥११॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'दुष्टर व दूणाश' रयि
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (पवमान) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले (सोम) = शरीर के सब ऐश्वर्यों के साधनभूत सोम! तू (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (रयिं विदा) = उस धन को प्राप्त करा जो कि (दुष्टरम्) = शत्रुओं से तैरने योग्य नहीं, अर्थात् जिस रयि को शत्रु आक्रान्त नहीं कर सकते । इस सोम के शरीर में सुरक्षित होने पर हमारे पर रोगादि का आक्रमण नहीं हो सकता। [२] उस रयि को तू हमें प्राप्त करा (यः) = जो कि (वनुष्यता) = हिंसकों से (दूणाश:) = नष्ट नहीं की जा सकती। सोम के सुरक्षित होने पर मन में काम-क्रोध-लोभ आदि दुर्वासनाओं का आक्रमण नहीं हो पाता । सोमी पुरुष कभी वासनाओं का शिकार नहीं होता ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - सोमरक्षण से हमें वह ऐश्वर्य प्राप्त होता है जो कि शत्रुओं से नष्ट नहीं किया जा सकता।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) पवितः हे परमात्मन् ! (सोम) हे सौम्यस्वभाव ! भवान् (अस्मभ्यम्) अस्मभ्यं तं (रयिम्) धनं (विदाः) ददातु (यः) यत् (वनुष्यता) शत्रुभिः (दूणाशः) अजेयं तथा (दुष्टरम्) दुष्प्राप्यमस्ति ॥११॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, lord of light and vibrancy of spirit, pure, purifying and sanctifying, exalted and overflowing, bring us wealth, honour and excellence of the rarest order unassailable by uncreative destroyers.
