त्वं स॑मु॒द्रिया॑ अ॒पो॑ऽग्रि॒यो वाच॑ ई॒रय॑न् । पव॑स्व विश्वमेजय ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tvaṁ samudriyā apo griyo vāca īrayan | pavasva viśvamejaya ||
पद पाठ
त्वम् । स॒मु॒द्रियाः॑ । अ॒पः । अ॒ग्रि॒यः । वाचः॑ । ई॒रय॑न् । पव॑स्व । वि॒श्व॒म्ऽए॒ज॒य॒ ॥ ९.६२.२६
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:62» मन्त्र:26
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:29» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:26
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (विश्वमेजय) हे सब संसार को भय से अपने वश में रखनेवाले ! आप (अग्रियः) प्रधान हैं (वाचः ईरयन्) अपने अनुशासन द्वारा (समुद्रियाः अपः) समुद्रसम्बन्धी जलों को (पवस्व) निर्बाध करिये ॥२६॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा की कृपा से ही सब पदार्थ निर्विघ्र रह सकते हैं, अन्यथा नहीं, इसी का वर्णन किया गया है ॥२६॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'विश्वमेजय'
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (विश्वमेजय) = सब रोगकृमियों व वासनाओं को कम्पित करके दूर करनेवाले सोम ! (त्वम्) = तू (पवस्व) = हमें प्राप्त हो। तेरे द्वारा सब रोगकृमियों का विनाश होकर हमें स्वस्थ व सबल शरीर प्राप्त हो तथा वासनाओं का विनाश होकर पवित्र हृदय मिले। [२] तू (अग्रियः) = हमारी उन्नति का साधक है । (वाचः) = ज्ञान की वाणियों को उन पवित्र हृदयों में (ईरयन्) = प्रेरित करता हुआ तू (समुद्रियाः अपः) = ज्ञानैश्वर्य के समुद्र भूत इन वेदों के [रायः समुद्राँश्चतुरः] ज्ञान जलों को हमें प्राप्त करा ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - रोगकृमियों व वासनाओं को कम्पित करके दूर करता हुआ यह सोम हमें ज्ञान- समुद्रभूत वेदों के ज्ञान जलों को प्राप्त कराये।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (विश्वमेजय) भयङ्करतयाखिलजगद्वशकर्त्तः ! हे परमात्मन् ! भवान् (अग्रियः) मुख्योऽस्ति (वाचः ईरयन्) स्वानुशासनेन (समुद्रियाः अपः) सागरसम्बन्धिजलानि (पवस्व) बाधारहितानि करोतु ॥२६॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O mover, shaker and inspirer of the world, you are the first and foremost leading light, flow forth purifying, sanctifying and energising the oceanic vapours and waters of space, and inspiring and preserving the eternal Word and the speech, manners and cultures of the world of humanity.
