ए॒ते सोमा॑ असृक्षत गृणा॒नाः श्रव॑से म॒हे । म॒दिन्त॑मस्य॒ धार॑या ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ete somā asṛkṣata gṛṇānāḥ śravase mahe | madintamasya dhārayā ||
पद पाठ
ए॒ते । सोमाः॑ । अ॒सृ॒क्ष॒त॒ । गृ॒णा॒नाः । श्रव॑से । म॒हे । म॒दिन्ऽत॑मस्य । धार॑या ॥ ९.६२.२२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:62» मन्त्र:22
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:28» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:22
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (एते सोमाः) ये सेनापति (महे श्रवसे गृणानाः) महा यश के लिये स्तुति किये गये (मदिन्तमस्य धारया) आह्लादक शौर्य-वीर्यादि शक्तियों की धारा के सहित (असृक्षत) पैदा किये जाते हैं ॥२२॥
भावार्थभाषाः - उक्त गुणोंवाले सेनापति संसार में यश और बल बढ़ाने के लिये उत्पन्न किये जाते हैं ॥२२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
श्रवसे महे
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (एते) = ये (सोमाः) = सोमकण [रेतःकण] (असृक्षत) = उत्पन्न किये जाते हैं । (गृणानाः) = स्तुति किये जाते हुए ये (महे श्रवसे) = महान् ज्ञान के लिये होते हैं । इनके रक्षण से ज्ञानाग्नि दीप्त होती है, बुद्धि सूक्ष्म बनती है । यह सूक्ष्म बुद्धि उत्कृष्ट ज्ञान की प्राप्ति का साधन बनती है । [२] ये सोम (मदिन्तमस्य) = [मादयितृतमस्य] अत्यन्त उल्लास को पैदा करनेवाले अपने रस की (धारया) = धारणशक्ति से उत्कृष्ट ज्ञान का साधन बनते हैं शरीर में सुरक्षित सोम अपनी धारणशक्ति के द्वारा जहाँ शरीर को स्वस्थ बनाता है, वहाँ मस्तिष्क को खूब दीप्त बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम महान् ज्ञान की प्राप्ति का साधन बनता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (एते सोमाः) इमे सेनाधीशाः (महे श्रवसे गृणानाः) महायशसे संस्तुताः (मदिन्तमस्य धारया) आनन्ददायकशौर्य्यादिशक्तिधारासहिताः (असृक्षत) उत्पाद्यन्ते ॥२२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - These somas of human beauty, culture and graces celebrated in song are created for the great sustenance of fame, honour and excellence of life by the stream of the most exciting annals of human history.
