वांछित मन्त्र चुनें

आ॒वि॒शन्क॒लशं॑ सु॒तो विश्वा॒ अर्ष॑न्न॒भि श्रिय॑: । शूरो॒ न गोषु॑ तिष्ठति ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

āviśan kalaśaṁ suto viśvā arṣann abhi śriyaḥ | śūro na goṣu tiṣṭhati ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ॒ऽवि॒शन् । क॒लश॑म् । सु॒तः । विश्वा॑ । अर्ष॑न् । अ॒भि । श्रियः॑ । शूरः॑ । न । गोषु॑ । ति॒ष्ठ॒ति॒ ॥ ९.६२.१९

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:62» मन्त्र:19 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:27» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:19


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सुतः) अभिषिक्त सेनापति (कलशम् आविशन्) शब्दायमान शस्त्रों में प्रवेश करता हुआ अर्थात् शस्त्रविद्या को सीखता हुआ (विश्वाः श्रियः अभ्यर्षन्) सम्पूर्ण लक्ष्मी को प्राप्त करता हुआ (गोषु) इन्द्रियों में (शूरः न) शूर के समान अर्थात् जितेन्द्रिय की तरह (तिष्ठति) स्थित होता है ॥१९॥
भावार्थभाषाः - जो पुरुष जितेन्द्रिय और दृढ़व्रती होते हैं, वे ही राजधर्म के लिये उपयुक्त होते हैं, अन्य नहीं ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

श्री-सम्पन्नता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सुतः) = उत्पन्न हुआ हुआ सोम (कलशम्) = इस शरीर रूप पात्र में (आविशन्) = प्रवेश करता हुआ (विश्वा:) = सब (श्रियः) = धनों की (अभि अर्षन्) = ओर ले जानेवाला होता है [अभिगमयन् सा० ] । शरीर में सुरक्षित हुआ हुआ सोम अन्नमय आदि सब कोशों को उस-उस ऐश्वर्य से परिपूर्ण करता है । [२] इन सब ऐश्वर्यों से युक्त यह शूरः न शूरवीर के समान (गोषु तिष्ठति) = सब इन्द्रियों पर अधिष्ठातृरूपेण स्थित होता है [गावः इन्द्रियाणि] । सोम का रक्षण करनेवाला पुरुष जितेन्द्रिय तो होता ही है। इन इन्द्रियों को वश में करना ही सब से बड़ी शूरता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम इसे श्री सम्पन्न बनाता है। यह सोमरक्षक पुरुष शूरवीर व इन्द्रियों का अधिष्ठाता बनता है ।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सुतः) अभिषिक्तः सेनाधीशः (कलशम् आविशन्) शब्दायमानशस्त्रेषु प्रविशन् शस्त्रविद्यां शिक्षन् इत्यर्थः (विश्वाः श्रियः अभ्यर्षन्) समस्तां लक्ष्मीं प्रापयन् (गोषु) इन्द्रियेषु (शूरः न) वीर इव जितेन्द्रिय इवेति यावत् (तिष्ठति) स्थितो भवति ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Taking over his positions of office, the leader, pioneer and ruler presides over lands and affairs of the order like a brave warrior moving forward and winning all wealth, honours, excellence and graces for the people, exhorted and exalted by them.