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तं सो॑तारो धन॒स्पृत॑मा॒शुं वाजा॑य॒ यात॑वे । हरिं॑ हिनोत वा॒जिन॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ sotāro dhanaspṛtam āśuṁ vājāya yātave | hariṁ hinota vājinam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । सो॒ता॒रः॒ । ध॒न॒ऽस्पृत॑म् । आ॒शुम् । वाजा॑य । यात॑वे । हरि॑म् । हि॒नो॒त॒ । वा॒जिन॑म् ॥ ९.६२.१८

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:62» मन्त्र:18 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:27» मन्त्र:3 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:18


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोतारः) हे अमात्यादि अभिषेक्ता लोगों ! (धनस्पृतम्) जो कि धनों का संचय करनेवाला है तथा (आशुम्) बहुव्यापी है (हरिम्) और शत्रुओं का विघातक (वाजिनम्) सुन्दर बलवाला है, उसको (वाजाय) शक्ति बढ़ाने को (यातवे) यात्रा करने के लिये (हिनोत) प्रेरणा करो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे प्रजाजनों ! तुम लोग जो उक्तगुणसम्पन्न पुरुष है, उसको अपने अभ्युदय के लिये सेनाधीशादि पदों पर नियुक्त करो ॥१८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वाजाय यातवे

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोतारः) = सोम का शरीर में उत्पादन करनेवाले पुरुषो! (तम्) = उस (हरिम्) = सब दुःखों का हरण करनेवाले सोम को हिनोत शरीर में ही प्रेरित करो। इसलिए इसे शरीर में प्रेरित करो कि (वाजाय) = यह शरीर में रोगकृमियों से होनेवाले संग्राम को करनेवाला हो तथा (यातवे) = हमें प्रभु की ओर ले चलनेवाला हो । [२] उस सोम का तुम शरीर में प्रेरित करो जो कि (धनस्पृतम्) = सब अन्नमय आदि कोशों के धनों का देनेवाला [grant] व रक्षण करनेवाला है [protect]। (आशुम्) = हमें शीघ्रता से कार्यों को करानेवाला है, और (वाजिनम्) = हमें शक्तिशाली बनानेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम के द्वारा हम सब कोशों के धनों को प्राप्त करके, नीरोग व शक्तिशाली बनकर, वासना-संग्राम में विजयी बनें और प्रभु की ओर जानेवाले हों ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोतारः) हे अभिषेक्तारोऽमात्यादयः ! (धनस्पृतम्) यो हि धनसञ्चयकर्तास्ति तथा (आशुम्) बहुव्यापनशीलोऽस्ति अथ च (हरिम्) शत्रुघातकोऽस्ति (यातवे) यात्रां कर्तुं (हिनोत) यूयं प्रेरयत ॥१८॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - That leader and dashing pioneer, instant in response and action, winner of life’s battles for wealth, honour and excellence, destroyer of want and suffering, O performers of the nation’s Soma yajna, exalt and exhort for onward progress and fulfilment of humanity’s joint and common mission on earth.