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ए॒ष वृषा॒ वृष॑व्रत॒: पव॑मानो अशस्ति॒हा । कर॒द्वसू॑नि दा॒शुषे॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

eṣa vṛṣā vṛṣavrataḥ pavamāno aśastihā | karad vasūni dāśuṣe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ए॒षः । व्र्षा॑ । वृष॑ऽव्रतः॑ । पव॑मानः । अ॒श॒स्ति॒ऽहा । कर॑त् । वसू॑नि । दा॒शुषे॑ ॥ ९.६२.११

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:62» मन्त्र:11 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:26» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:11


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषा) कामनाओं की वर्षा करनेवाला (वृषव्रतः) कामनापूर्तिरूप ही व्रत धारण करनेवाला (पवमानः) सर्वपावक (अशस्तिहा) दुराचारियों का नाशक (एषः) यह सेनापति (दाशुषे) भाग देनेवाले के लिये (वसूनि करत्) प्रत्येक प्रकार के धनों की प्राप्ति का प्रयत्न करता है ॥११॥
भावार्थभाषाः - उक्तगुणसम्पन्न सेनापति सब प्रकार के ऐश्वर्य उत्पन्न करके प्रजा में सुख बढ़ाता है ॥११॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'वृषव्रत' सोम

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (एषः) = यह सोम (वृषा) = हमारे पर सुखों का वर्षण करनेवाला है । (वृषव्रतः) शक्तिशाली कर्मोंवाला है। इसके रक्षित होने पर हमारे कर्म निर्बल नहीं होते । शक्तिपूर्वक कर्मों को करते हुए हम अवश्य उन कर्मों में सफल होते हैं। (पवमानः) = यह हमारे जीवन को पवित्र बनाता है। (अशस्तिहा) = सब बुराइयों का नाश करता है। [२] यह सोम (दाशुषे) = प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाले पुरुष के लिये (वसूनि करत्) = निवास के लिये आवश्यक सब तत्त्वों को करनेवाला होता है। शरीर में सुरक्षित सोम सब वसुओं को जन्म देता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - यह सोम हमारे लिये सब सुखों का वर्षण करनेवाला, हमें पवित्र करनेवाला व हमारे जीवन में सब वसुओं को जन्म देनेवाला है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषा) कामनावर्षकः (वृषव्रतः) अभीष्टपूर्तिरूपव्रतधारी (पवमानः) सर्वपावकः (अशस्तिहा) दुष्टघातकः (एषः) अयं सेनापतिः (दाशुषे) भागदात्रे (वसूनि करत्) अनेकविधधनप्राप्त्यै प्रयत्नं करोति ॥११॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This virile giver of showers of fulfilment, the very commitment incarnate of divinity to beneficence, always flowing, creating and giving, destroyer of calumny and evil doers, creates and provides wealth, honour and excellence for the generous yajnic givers.