स न॑: पुना॒न आ भ॑र र॒यिं वी॒रव॑ती॒मिष॑म् । ईशा॑नः सोम वि॒श्वत॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa naḥ punāna ā bhara rayiṁ vīravatīm iṣam | īśānaḥ soma viśvataḥ ||
पद पाठ
सः । नः॒ । पु॒ना॒नः । आ । भ॒र॒ । र॒यिम् । वी॒रऽव॑तीम् । इष॑म् । ईशा॑नः । सो॒म॒ । वि॒श्वतः॑ ॥ ९.६१.६
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:61» मन्त्र:6
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:19» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:6
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे विद्वन् ! (सः) वह आप (विश्वतः ईशानः) चारों ओर से अपना अधिकार जमाते हुए (नः पुनानः) हम लोगों को पवित्र करते हुए (वीरवतीम्) बड़े-बड़े वीरों से युक्त (इषम् रयिम्) अन्न-धनादि सम्पत्ति से (आ भर) अपने जनस्थानों को परिपूर्ण करिये ॥६॥
भावार्थभाषाः - विद्वान् लोग अपने विद्याबल से अपने देश को ऐश्वर्यों से परिपूर्ण करते हैं, इसलिये विद्वानों का सत्कार करना परम कर्तव्य है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'विश्वतः ईशान' सोम
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (नः) = हमें (पुनानः) = पवित्र करता हुआ (रयिम्) = ज्ञानैश्वर्य को (आभर) = प्राप्त करा । हे सोम ! तू (वीरवतीम्) = वीरतावाली (इषम्) = प्रेरणा को प्राप्त करा । सुरक्षित सोम [क] हमें पवित्र करता है। [ख] ज्ञानैश्वर्य को हमारे लिये प्राप्त कराता है। [ग] हमें वीर बनाता है, [घ] प्रभु - प्रेरणा को सुनने के योग्य करता है । [२] हे (सोम) = वीर्यशक्ते! तू (विश्वतः ईशानः) = शरीर, मन व बुद्धि सभी के दृष्टिकोण से तू ही ईश है। तू ही हमारे शरीर को सशक्त बनाता है, तू ही मन को निर्मल बनाता है, बुद्धि को तू ही तीव्र करता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमें पवित्र करता हुआ 'रयि, वीरता व प्रेरणा' को प्राप्त कराता है। यह सोम ही 'विश्वतः ईशान' है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे बुद्धवर ! (सः) स त्वं परमात्मा (विश्वतः ईशानः) सर्वतः स्वाधिकारं स्थापयन् (नः पुनानः) अस्मान् पवित्रयन् (वीरवतीम्) महावीरयुताभिः (इषम् रयिम्) अन्नधनादिसम्पत्तिभिः (आ भर) आत्मजनस्थानानि परिपूरय ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, lord ruler and benefactor of the entire world, pure and purifier of all, bring us food and energy for body, mind and soul, versatile wealth and power abounding in brave and heroic progeny for future generations.
