जघ्नि॑र्वृ॒त्रम॑मि॒त्रियं॒ सस्नि॒र्वाजं॑ दि॒वेदि॑वे । गो॒षा उ॑ अश्व॒सा अ॑सि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
jaghnir vṛtram amitriyaṁ sasnir vājaṁ dive-dive | goṣā u aśvasā asi ||
पद पाठ
जघ्निः॑ । वृ॒त्रम् । अ॒मि॒त्रिय॑म् । सस्निः॑ । वाज॑म् । दि॒वेऽदि॑वे । गो॒ऽसाः । ऊँ॒ इति॑ । अ॒श्व॒ऽसाः । अ॒सि॒ ॥ ९.६१.२०
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:61» मन्त्र:20
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:21» मन्त्र:5
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:20
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अमित्रियम् वृत्रम् जघ्निः) आप, जो आप की आज्ञा के प्रतिकूल है, उस पापी के हन्ता हैं। तथा (वाजम् दिवेदिवे सस्निः) प्रतिदिन संग्राम के लिये सैनिक विभाग में तत्पर रहते हैं (गोपाः उ अश्वसाः असि) गो अश्व आदि हितकारक जीवों के बढ़ानेवाले हैं ॥२०॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा का वज्र दुष्टों के दमन के लिये सदैव उद्यत रहता है। इस मन्त्र में परमात्मा की दण्डशक्ति का वर्णन किया गया है ॥२०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गोषाः अश्वसाः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] यह सोम (अमित्रियम्) = हमारे अमित्र [शत्रु] पक्ष में होनेवाले (वृत्रम्) = वासनारूप ज्ञान-नाशक शत्रु को (जघ्निः) = मारनेवाला है । सोमरक्षण वासना को विनष्ट करता है। [२] वासना को विनष्ट करके यह (दिवे दिवे) = प्रतिदिन (वाजम्) = शक्ति को (सस्त्रिः) = शुद्ध करनेवाला है । [३] (गोषाः असि) = हे सोम तू हमें उत्कृष्ट ज्ञानेन्द्रियों को देनेवाला है ! (उ) = और (अश्वसाः असि) = उत्कृष्ट कर्मेन्द्रियों को प्राप्त करानेवाला है। सुरक्षित सोम कर्मेन्द्रियों को सशक्त बनाता है, ज्ञानेन्द्रियों को ज्ञानग्रहण समर्थ करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से [क] वृत्र [वासना] का विनाश होता है, [ख] वह शक्ति को शुद्ध करता है, [ग] ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियों को सशक्त बनाता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अमित्रियम् वृत्रम् जघ्निः) भवान् यो भवदाज्ञाप्रतिकूलस्तं पापिनं हन्ति तथा (वाजम् दिवे दिवे सस्निः) प्रतिदिनं सङ्ग्रामाय सैनिकविभागे तत्परोऽस्ति (गोषाः उ अश्वसाः असि) गवाश्वादिहितकृज्जीवानां वर्धकोऽस्ति ॥२०॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, power and peace of divinity, destroyer of the evil and darkness of negative forces, constant catalytic force of nature in creative evolution day in and day out, you are the giver of earthly life and dynamic motion for onward progress.
