स न॒ इन्द्रा॑य॒ यज्य॑वे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: । व॒रि॒वो॒वित्परि॑ स्रव ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa na indrāya yajyave varuṇāya marudbhyaḥ | varivovit pari srava ||
पद पाठ
सः । नः॒ । इन्द्रा॑य । यज्य॑वे । वरु॑णाय । म॒रुत्ऽभ्यः॑ । व॒रि॒वः॒ऽवित् । परि॑ । स्र॒व॒ ॥ ९.६१.१२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:61» मन्त्र:12
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:20» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:12
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह कर्मयोगी (वरिवोवित्) सम्पूर्ण धनों का प्रापयिता आप (नः) हमारे (यज्यवे) प्रशंसनीय (इन्द्राय वरुणाय मरुद्भ्यः) तैजस जलीय तथा वायवीय पदार्थों की सिद्धि के लिये (परिस्रव) उद्यत होवें ॥१२॥
भावार्थभाषाः - अग्नि तथा जलादि सब पदार्थ कर्मयोगी पुरुषों के द्वारा सब प्रकार के सुखो को उत्पन्न करते हैं ॥१२॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'वरिवोवित्' सोम
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (सः) = वह तू (नः) = हमारे लिये (वरिवोवित्) = सब धनों का प्राप्त करानेवाला होकर (परिस्स्रव) = शरीर में चारों ओर प्रवाहित हो । [२] तू (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये प्राप्त हो । (यज्यवे) = यज्ञशील पुरुष के लिये प्राप्त हो । (वरुणाय) = द्वेष का निवारण करनेवाले व व्रतों के बन्धन में अपने को बाँधनेवाले के लिये प्राप्त हो । (मरुद्भ्यः) = प्राणसाधनों के लिये प्राप्त हो । वस्तुतः सोमरक्षण के चार साधन हैं— [क] जितेन्द्रियता, [ख] यज्ञशीलता, [ग] निर्देषता व व्रतबन्धन, [घ] प्राणायाम ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम 'जितेन्द्रियता, यज्ञशीलता, निर्देषता, व्रतबन्धन व प्राणायाम' के द्वारा सोम का रक्षण करते हुए सब ऐश्वर्यों को प्राप्त करें।
0 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) स कर्मयोगी (वरिवोवित्) समस्तधनप्रापको भवान् (नः) अस्माकं (यज्यवे) प्रशंसनीयानां (इन्द्राय वरुणाय मरुद्भ्यः) तैजसजलीयवायवीयपदार्थानां संसिद्धये (परिस्रव) उद्यतो भवतु ॥१२॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, lord of peace and purity, power and piety, creator, controller and commander of the entire wealth of life, flow on by the dynamics of nature and bless us for the benefit of power and glory, yajna and unity among the yajakas, judgement and right values and the vibrant forces of law and order.
