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प्र गा॑य॒त्रेण॑ गायत॒ पव॑मानं॒ विच॑र्षणिम् । इन्दुं॑ स॒हस्र॑चक्षसम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pra gāyatreṇa gāyata pavamānaṁ vicarṣaṇim | induṁ sahasracakṣasam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प्र । गा॒य॒त्रेण॑ । गा॒य॒त॒ । पव॑मानम् । विऽच॑र्षणिम् । इन्दु॑म् । स॒हस्र॑ऽचक्षसम् ॥ ९.६०.१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:60» मन्त्र:1 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:17» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:1


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आर्यमुनि

अब उसके गुणों के कीर्त्तन से परमात्मा की स्तुति करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - हे होता लोगों ! तुम (इन्दुम्) परमैश्वर्यसम्पन्न (पवमानम्) सबको पवित्र करनेवाले (सहस्रचक्षसम्) अनेकविध वेदादिवाणीवाले (विचर्षणिम्) सर्वद्रष्टा परमात्मा को (गायत्रेण) गायत्रादि छन्दों से (प्रगायत) गान करो ॥१॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा उपदेश करता है कि हे मनुष्यों ! तुम वेदाध्ययन से अपने आपको पवित्र करो ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'पवमान' इन्दु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (गायत्रेण) = गायत्र साम के द्वारा इस (पवमानम्) = हमारे जीवन को पवित्र करनेवाले (इन्दुम्) = सोम को प्रगायत प्रगीत करो। इस सोम के गुणों का गान हमें इसके रक्षण के लिये प्रेरित करेगा । वेद में इस सोम का गायन प्रधानतया गायत्री छन्द के मन्त्रों में ही है। यह छन्द भी 'गया: त्राणा:, तान् तत्रे' इस व्युत्पत्ति से प्राणरक्षण का संकेत कर रहा है। सुरक्षित सोम ही प्राणरक्षण का साधन बनता है। [२] उस सोम का गायन करो जो (विचर्षणिम्) = विशेषरूप से हमारा ध्यान करता है [ look after ] और (सहस्त्रचक्षसम्) = सहस्रों ज्ञानों को देनेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम सोम के गुणों का गायन करें, 'यह पवमान है, सहस्रचक्षस् ' है ।
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आर्यमुनि

अत्र तद्गुणकीर्तनेन परमात्मा स्तूयते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे होतारो जनाः ! यूयं (इन्दुम्) परमैश्वर्यसम्पन्नं (पवमानम्) सर्वपवितारं (सहस्रचक्षसम्) बहुविधवेदादिशब्दवन्तं (विचर्षणिम्) सर्वद्रष्टारं परमात्मानं (गायत्रेण) गायत्रादिछन्दसा (प्रगायत) गानं कुरुत ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O devotees, sing and enthusiastically celebrate with gayatri hymns Soma, pure, purifying and ever flowing in cosmic dynamics, all moving, omnipresent Spirit of bliss and joy, lord of a thousandfold vision and voice of Infinity.