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अ॒भि त्यं मद्यं॒ मद॒मिन्द॒विन्द्र॒ इति॑ क्षर । अ॒भि वा॒जिनो॒ अर्व॑तः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

abhi tyam madyam madam indav indra iti kṣara | abhi vājino arvataḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒भि । त्यम् । मद्य॑म् । मद॑म् । इन्दो॒ इति॑ । इन्द्रः॑ । इति॑ । क्ष॒र॒ । अ॒भि । वा॒जिनः॑ । अर्व॑तः ॥ ९.६.२

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:6» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:26» मन्त्र:2 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:2


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रेममय (इन्द्र) परमात्मन् ! आप (त्यं, मदं, मद्यम्) उस आह्लादजनक अपने प्रेममय मद की (अभि क्षर) वृष्टि करें, जो (अभिवाजिनः) सब बलकारक वस्तुओं में से हमारे योग्य है (अर्वतः) और जो ऐश्वर्य द्वारा व्याप्त करानेवाला है ॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में सर्वोपरि हर्षजनक परमात्मा के प्रेम की प्रार्थना की गयी है ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'मद्य मद' का अभिक्षरण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्दो) = सोम [वीर्य] ! (इन्द्रः इति) = तू सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाला है, इसलिए (त्यम्) = उस (मद्यम्) = आनन्द के कारणभूत (मदम्) = मद को, हर्ष को अथक हर्षजनक रस को (अभिक्षर) = हमारी ओर प्राप्त करा । [२] इस मद्य मद के द्वारा (वाजिनः) = शक्तिशाली (अर्वतः) = इन्द्रियाश्वों को (अभि) = [क्षर] प्राप्त करा । सोम के रक्षण से शरीर में ही एक उल्लासजनक रस का क्षरण होता है । इसी रस के द्वारा इन्द्रियाँ शक्तिशाली बनती हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम के रक्षण से उल्लासमय जीवन प्राप्त होता है तथा इन्द्रियाँ शक्तिशाली बनती हैं।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रेममय ! (इन्द्र) परमात्मन् ! भवान् (त्यं, मदं, मद्यम्) तमाह्लादजनकं प्रेममयं मद्यं (अभिक्षर) वर्षतु यः (अभिवाजिनः) अखिलबलकारकवस्तुषु मदर्हः (अर्वतः) यश्चैश्वर्येण सर्वत्र व्याप्तिं कारयति ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of power and peace, love and chivalry, release that exciting and beatifying flow of divine spirit of ecstasy and enthusiasm which blesses us with strength and speed worthy of warriors pressing on way to victory.