वांछित मन्त्र चुनें

यवं॑यवं नो॒ अन्ध॑सा पु॒ष्टम्पु॑ष्टं॒ परि॑ स्रव । सोम॒ विश्वा॑ च॒ सौभ॑गा ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yavaṁ-yavaṁ no andhasā puṣṭam-puṣṭam pari srava | soma viśvā ca saubhagā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यव॑म्ऽयवम् । नः॒ । अन्ध॑सा । पु॒ष्टम्ऽपु॑ष्टम् । परि॑ । स्र॒व॒ । सोम॑ । विश्वा॑ । च॒ । सौभ॑गा ॥ ९.५५.१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:55» मन्त्र:1 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:12» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:1


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

अब परमात्मा के अनन्तत्व अनेकवस्तुजनकत्व आदि गुणों का वर्णन करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! आप (नः) हमारे लिये (अन्धसा) अन्नादिकों के सहित (पुष्टं पुष्टम्) अति बलप्रद (यवं यवम्) संचित अनेक पदार्थों को तथा (विश्वा च सौभगा) सम्पूर्ण सौभाग्य को (परिस्रव) उत्पन्न करिये ॥१॥
भावार्थभाषाः - सम्पूर्ण ऐश्वर्य और सम्पूर्ण सौभाग्य को देनेवाला एकमात्र परमात्मा ही है, कोई अन्य नहीं ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

यव-पुष्ट-सौभग

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (नः) = हमारे लिये (अन्धसा) = सोम्य अन्नों के द्वारा (यवं यवम्) = प्रत्येक बुराई के अमिश्रण तथा अच्छाई के मिश्रण को परिस्त्रव प्राप्त करा । सोमरक्षण के उद्देश्य से हम सोम्य अन्नों का ही सेवन करें। यह सोम्य अन्नों का सेवन हमें दुरितों से दूर करके भद्र की ओर ही ले चलनेवाला हो । [२] हे सोम ! (च) = और तू हमारे लिये (विश्वा सौभगा) = सब सौभाग्यों को प्राप्त करानेवाला हों। 'ऐश्वर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यशसः श्रियः । ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरणा' ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान व वैराग्य रूप सभी सौभग्य हमें प्राप्त हों । भावार्थ- सोमरक्षण से [क] सब बुराइयाँ दूर होकर अच्छाइयाँ प्राप्त होती हैं, [ख] अंग- प्रत्यंग पुष्ट होता है, [ग] सब सौभाग्य हमें प्राप्त होते हैं ।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

अथ परमात्मनोऽनन्तत्वविविधवस्तूत्पादकत्वादिगुणा वर्ण्यन्ते।

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे जगदीश ! भवान् (नः) अस्मभ्यम् (अन्धसा) सहान्नादिभिः (पुष्टं पुष्टम्) अतिबलप्रदान् (यवं यवम्) सञ्चितानेकपदार्थान् तथा (विश्वा च सौभगा) सम्पूर्णसौभाग्यानि (परिस्रव) समुत्पादयतु ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Soma, Spirit of peace, power and plenty, flow forth, vitalise, purify and inspire us with fresh energy, power and grace of culture at every stage of our growth, acquisition and progress, beatify all our good fortune and prosperity of life in the world.