नि शुष्म॑मिन्दवेषां॒ पुरु॑हूत॒ जना॑नाम् । यो अ॒स्माँ आ॒दिदे॑शति ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ni śuṣmam indav eṣām puruhūta janānām | yo asmām̐ ādideśati ||
पद पाठ
नि । शुष्म॑म् । इ॒न्दो॒ । एषा॑म् । पुरु॑ऽहूत । जना॑नाम् । यः । अ॒स्मान् । आ॒ऽदिदे॑शति ॥ ९.५२.४
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:52» मन्त्र:4
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:9» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:4
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे परमात्मन् ! (पुरुहूत) हे अखिल विद्वानों से स्तुति किये गये ! (एषाम् जनानाम् बलम् नि) इन विद्वानों के बलों को बढ़ाइये (यः अस्मान् आदिदेशति) जो कि आप हम लोगों का अनुशासन करते हैं ॥४॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में परमात्मा ने इस बात का उपदेश दिया है कि जो पुरुष विद्या तथा बल को उपलब्ध करके सत्कर्म्मी तथा विनीत बनते हैं, उन्ही से संसार शिक्षा का लाभ करता है ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
काम आदि की बल का अभिभव
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्दो) = सोम ! (पुरुहूत) = बहुतों से पुकारे जानेवाला तू जिस सोम की सभी आराधना करते हैं ऐसा तू (एषां जनानाम्) = इन विकसित शक्तिवाले, अति प्रबल शत्रुओं के (शुष्मम्) = शोषक बल को (नि) = [न्यक् कुरु] पराभूत कर । इन हमारे शत्रुभूत काम-क्रोध-लोभ के बल को पराजित करनेवाला है। [२] इन शत्रुओं के उस बल को पराभूत कर (यः) = जो कि (अस्मान्) = हमें (आदिदेशति) =[challange] युद्ध के लिये ललकारता-सा है। काम-क्रोध-लोभ का बल हमें युद्ध के लिये ललकारता हुआ सदा पराजित-सा कर देता है। शरीर में हम सोम का रक्षण कर पाते हैं तो इन सब शत्रुओं को पराजित करने में समर्थ होते हैं । प्रभु की उपासना इस सोम के द्वारा ही हमें सबल बनाती है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से हम काम-क्रोध-लोभ के वेग को पराभूत करनेवाले होते हैं ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे सर्वनियन्तः परमेश्वर ! (पुरुहूत) हे बुधगुणस्तुत ! (एषाम् जनानाम् बलम् नि) विदुषामेतेषामोजो वर्धय। (यः अस्मान् आदिदेशति) यो भवान् अस्माकमनुशास्तास्ति ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indu, lord of peace and plenty who rule over us, invoked, adored and worshipped pray increase the power and prosperity of those people who follow the rule of your law of discipline and generosity.
