तव॒ त्य इ॑न्दो॒ अन्ध॑सो दे॒वा मधो॒र्व्य॑श्नते । पव॑मानस्य म॒रुत॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tava tya indo andhaso devā madhor vy aśnate | pavamānasya marutaḥ ||
पद पाठ
तव॑ । त्ये । इ॒न्दो॒ इति॑ । अन्ध॑सः । दे॒वाः । मधोः॑ । वि । अ॒श्न॒ते॒ । पव॑मानस्य । म॒रुतः॑ ॥ ९.५१.३
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:51» मन्त्र:3
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:8» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:3
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे परमात्मन् ! (पवमानस्य) सबको पवित्र करनेवाले (तव) आपके (मधोः) मधुर (अन्धसः) रस का (देवाः त्ये मरुतः) दिव्यगुणसम्पन्न विद्वान् पान करते हैं ॥३॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मामृतरसास्वाद के लिए दिव्य शक्तियों को उपलब्ध करना अत्यावश्यक है, इसलिए उक्त मन्त्र में परमात्मा ने दिव्य शक्तियों का उपदेश किया है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
मधुर व पवमान
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! (त्ये) = वे (देवा:) = देववृत्ति के व्यक्ति और (मरुतः) = प्राणसाधना करनेवाले पुरुष (तव व्यश्नते) = तेरा ही सेवन करते हैं, शरीर में तुझे व्याप्त करने के लिये यत्नशील होते हैं। शरीर में सोम को सुरक्षित करने के लिये आवश्यक है कि हम आसुरभावों से ऊपर उठें, दिव्यभावों को अपने हृदयों में भरें। इसके हम प्राणसाधना करनेवाले बनें । प्राणसाधना द्वारा शरीर में सोम की ऊर्ध्वगति होती है। [२] उस सोम का हम शरीर में व्यापन करें जो कि (अन्धसः) = शरीर का अन्न बनता है, शरीर का वस्तुतः धारण करनेवाला यह सोम ही है । (मधोः) = यह जीवन को मधुर बनानेवाला है और (पवमानस्य) = हमें पवित्र बनानेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण में देववृत्ति व प्राणायाम सहायक हैं। यह सोम शरीर का अन्न है, जीवन को धुर बनाता है तो हमें पवित्र करता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे जगद्रक्षक परमात्मन् ! (पवमानस्य) सर्वपवित्रकारकस्य (तव) भवतः (मधोः) मधुरस्य (अन्धसः) रसस्य (देवाः त्ये मरुतः) दिव्यगुणसम्पन्ना विद्वांसः (व्यश्नते) पानं कुर्वन्ति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Then, O Soma, Spirit of divinity, the noblest, most vibrant generous and brilliant souls have a drink of the elixir of your honey sweet presence flowing exuberantly at the purest.
