दि॒वः पी॒यूष॑मुत्त॒मं सोम॒मिन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ । सु॒नोता॒ मधु॑मत्तमम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
divaḥ pīyūṣam uttamaṁ somam indrāya vajriṇe | sunotā madhumattamam ||
पद पाठ
दि॒वः । पी॒यूष॑म् । उ॒त्ऽत॒मम् । सोम॑म् । इन्द्रा॑य । व॒ज्रिणे॑ । सु॒नोत॑ । मधु॑मत्ऽतमम् ॥ ९.५१.२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:51» मन्त्र:2
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:8» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:2
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे अध्वर्य लोगों ! जो कि (मधुमत्तमम्) सब रसो में उत्तम है (दिवः पीयूषम्) और द्युलोक का अमृत है, ऐसे (उत्तमम् सोमम्) उत्तम परमात्मा को (इन्द्राय पातवे) अपने जीवात्मा की तृप्ति के लिये (सुनोत) ध्यान का विषय बनाओ ॥२॥
भावार्थभाषाः - जो अपनी तृप्ति के लिए एकमात्र परमात्मा को ध्यान का विषय बनाते हैं, वे उस ब्रह्मामृत का पान करते हैं, अन्य नहीं ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
दिवः पीयूषम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्राय) = परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिये और (वज्रिणे) = वज्रतुल्य दृढ़ शरीरवाला बनने के लिये (सोमम्) - सोम को [वीर्यशक्ति को] (सुनोता) = अपने अन्दर सम्पादित करो। शरीर में सुररिक्षत हुआ हुआ यह सोम रोगकृमियों के विनाश के द्वारा हमें दृढ़ शरीरवाला बनाता है। यह हमारी ज्ञानाग्नि को दीप्त करके हमें प्रभु-दर्शन के योग्य बनाता है। [२] यह सोम तो (दिवः पीयूषम्) = द्युलोक का अमृत है। शरीर में मस्तिष्क ही द्युलोक है। यह सोम मस्तिष्क को कभी नष्ट न होने देनेवाला है। ज्ञानाग्नि का यही तो ईंधन बनता है । (उत्तम्) = यह उत्तम है, अर्थात् हमें सर्वोकृष्ट स्थिति में प्राप्त करानेवाला है। मधुमत्तमम् जीवन को अतिशयेन मधुर बनानेवाला है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम ज्ञान का अमृत है, ज्ञान को न नष्ट होने देनेवाला है, हमें उत्कृष्ट स्थिति में प्राप्त कराता है, हमारे जीवन को मधुर बनाता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे अध्वर्यवः ! यो हि (मधुमत्तमम्) सर्वरसेषूत्तमोऽस्ति (दिवः पीयूषम्) अथ च द्युलोकस्य यदमृतमस्ति, एवं भूतम् (उत्तमम् सोमम्) उत्तमं परमात्मानं (इन्द्राय पातवे) स्वस्य जीवात्मनस्तृप्तये (सुनोत) ध्यानविषयं कुरुत ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Create the highest honey sweet Soma of divine consciousness, highest exhilarating experience of the light of heaven for the soul’s awareness, and then rise to adamantine power against all possible violations.
