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पव॑स्व वृ॒ष्टिमा सु नो॒ऽपामू॒र्मिं दि॒वस्परि॑ । अ॒य॒क्ष्मा बृ॑ह॒तीरिष॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pavasva vṛṣṭim ā su no pām ūrmiṁ divas pari | ayakṣmā bṛhatīr iṣaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पव॑स्व । वृ॒ष्टिम् । आ । सु । नः॒ । अ॒पाम् । ऊ॒र्मिम् । दि॒वः । परि॑ । अ॒य॒क्ष्माः । बृ॒ह॒तीः । इषः॑ ॥ ९.४९.१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:49» मन्त्र:1 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:6» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:1


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आर्यमुनि

अब परमात्मा की शक्ति का वर्णन करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (नः) आप हमारे लिये (दिवस्परि) द्युलोक से (अपामूर्मिम्) जल की तरङ्गोंवाली (सुवृष्टिम्) सुन्दर वृष्टि को (आपवस्व) सम्यक् उत्पन्न करिये तथा (अयक्ष्माः बृहतीः इषः) रोगरहित महान् अन्नादि एश्वर्य को उत्पन्न करिये ॥१॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ने ही द्युलोक को वर्षणशील और पृथिवीलोक को नानाविध अन्नादि ओषधियों की उत्पत्ति का स्थान बनाया है ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अयक्ष्माः बृहतीः इषः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! तू (नः) = हमारे लिये (वृष्टिम्) = सुखों के वर्षण को (आ सु पवस्व) = समन्तात् उत्तमता से प्राप्त करा सोमरक्षण के द्वारा हम सर्वथा सुखी हों । (दिवः परि) = मस्तिष्क रूप द्युलोक से (अपाम्) = कर्मों की (ऊर्मिम्) = तरंग को प्राप्त करा । अर्थात् सोमरक्षण के द्वारा हम सदा ज्ञानपूर्वक बड़े उल्लास के साथ कर्मों को करनेवाले हों। [२] हे सोम ! तू हमें उन (इषः) = प्रेरणाओं को प्राप्त करा जो कि (अयक्ष्माः) = सब प्रकार के रोगों से रहित हैं, हमें सब रोगों से ऊपर उठानेवाली हैं तथा (बृहती:) = हमारी वृद्धि का कारण बनती है । अन्तः स्थित प्रभु से हमें प्रेरणा प्राप्त होती है। यह प्रेरणा हमारे उत्थान का कारण बनती है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम [क] हमें नीरोग बनाकर सुखी करता है, [ख] ज्ञानपूर्वक उत्साहमय कर्मों में लगाता है, [ग] प्रभु प्रेरणा को सुनने योग्य हमें बनाता है। यह प्रेरणा हमें नीरोग व उन्नत करती है ।
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आर्यमुनि

अथ परमात्मनः शक्तिर्वर्ण्यते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे जगदीश ! (नः) भवानस्मभ्यं (दिवस्परि) द्युलोकात् (अपामूर्मिम्) जलतरङ्गिणीं (सुवृष्टिम्) सुन्दरवृष्टिं (आपवस्व)   सम्यगुत्पादयतु तथा (अयक्ष्माः बृहतीः इषः) रोगरहितान्महदन्नाद्यैश्वर्यांश्चोत्पादयतु ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Soma, lord of peace and plenty, give us holy showers of waters, wave on wave of the rain, and give us abundant food, energy and knowledge free from pollution and negativities.