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तं त्वा॑ नृ॒म्णानि॒ बिभ्र॑तं स॒धस्थे॑षु म॒हो दि॒वः । चारुं॑ सुकृ॒त्यये॑महे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ tvā nṛmṇāni bibhrataṁ sadhastheṣu maho divaḥ | cāruṁ sukṛtyayemahe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । त्वा॒ । नृ॒म्णानि॑ । विभ्र॑तम् । स॒धऽस्थे॑षु । म॒हः । दि॒वः । चारु॑म् । सु॒ऽकृ॒त्यया॑ । ई॒म॒हे॒ ॥ ९.४८.१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:48» मन्त्र:1 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:5» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:1


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आर्यमुनि

अब परमात्मा के गुण, कर्म और स्वभाव कहे जाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (नृम्णानि बिभ्रतम्) अनेक रत्नों को धारण करनेवाले (दिवो महः) द्युलोक के प्रकाशक (सुकृत्यया चारुम्) सुन्दर कर्मों से शोभायमान (तं त्वा) पूर्वोक्त आपकी (सधस्थेषु) यज्ञस्थलों में (ईमहे) स्तुति करते हैं ॥१॥
भावार्थभाषाः - सम्पूर्ण ऐश्वर्यों का धारण करनेवाला एकमात्र परमात्मा ही है ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'शक्ति का धारक' सोम

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (नृम्णानि बिभ्रतम्) = [strength, wealth] शक्तियों व तेज आदि ऐश्वर्यों को धारण करते हुए (चारुम्) = सुन्दर जीवन को सुन्दर बनानेवाले, (तं त्वा) = उस तुझ को (सुकृत्यया)- = शोभन कर्मों के द्वारा (ईमहे) = [ wish, desire ] चाहते हैं । सोम के रक्षण से हमारी प्रवृत्ति शुभ कर्मों की ओर ही होती है। [२] (महः दिवः) = महान् ज्ञान के (सधस्थेषु) = मिलकर ठहरने के स्थानों के निमित्त हम इस सोम की कामना करते हैं। सोम के रक्षण से हम चित्तवृत्ति का निरोध करके हृदय में प्रभु का दर्शन करते हैं। यह हृदय 'सधस्थ' होता है, यहाँ हम परमात्मा के साथ स्थित हो रहे होते हैं। इस स्थिति में ही हमें महान् ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसलिए 'महः दिवः सधस्थेषु' इन शब्दों का प्रयोग हुआ है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से उत्कृष्ट ज्ञान प्राप्त होता है। इसके रक्षण से हम उत्तम कर्मों में प्रेरित होते हैं। यह हमारे लिये शक्ति व धनों को धारण करता है।
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आर्यमुनि

अथ जगत्कर्तुः गुणकर्मस्वभावा उच्यन्ते।

पदार्थान्वयभाषाः - (नृम्णानि बिभ्रतम्) बहुरत्नधारणकर्त्तारं (दिवो महः) द्युलोकप्रकाशकं (सुकृत्यया चारुम्) मनोहरकृत्यैः शोभायमानं (तं त्वा) पूर्वोक्तं भवन्तं (सधस्थेषु) यज्ञस्थलेषु (ईमहे) स्तुमः ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, Spirit of peace, purity and power, with holy acts of homage in the halls of yajna, we invoke, adore and worship you, lord of beauty and bliss, and exalt you in action, harbinger of the jewels of wealth, honour and excellence from the lofty regions of the light of heaven.