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पु॒ना॒नो या॑ति हर्य॒तः सोमो॑ गी॒र्भिः परि॑ष्कृतः । विप्र॑स्य॒ मेध्या॑तिथेः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

punāno yāti haryataḥ somo gīrbhiḥ pariṣkṛtaḥ | viprasya medhyātitheḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पु॒ना॒नः । या॒ति॒ । ह॒र्य॒तः । सोमः॑ । गीः॒ऽभिः । परि॑ऽकृतः । विप्र॑स्य । मेध्य॑ऽअतिथेः ॥ ९.४३.३

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:43» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:33» मन्त्र:3 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:3


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (गीर्भिः परिष्कृतः) वेदवाणियों से स्तुति किया गया (हर्यतः सोमः) दर्शनीय परमात्मा (पुनानः) पवित्र करता हुआ (मेध्यातिथेः विप्रस्य) ज्ञानयोगी विद्वान् के हृदय में (याति) निवास करता है ॥३॥
भावार्थभाषाः - जो लोग ज्ञानयोगी बनकर ज्ञानप्रदीप से अपने हृदयमन्दिर को प्रदीप्त करते हैं, उनके हृदयरूपी मन्दिर में परमात्मा का पूर्णतया आभास होता है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

विप्र मेध्यातिथि द्वारा सोम का पवित्रीकरण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (विप्रस्य) = अपना विशेषरूप से पूरण करनेवाले, (मेध्यातिथेः) = पवित्र प्रभु को अपना अतिथि बनानेवाले, प्रभु का, हृदयासन पर बिठाकर, आतिथ्य करनेवाले, ज्ञानी पुरुष की (गीभिः) = स्तुति- वाणियों से यह (सोमः) = सोम [वीर्य] (परिष्कृतः) = सुसंस्कृत होता है। प्रभु की उपासना, वासनाओं को नहीं पैदा होने देती। यह वासनाशून्यता सोम को पवित्र रखती है । [२] यह पवित्र (हर्यतः) = कान्ति से युक्त सोम (पुनानः) = हमारे जीवन को पवित्र करता हुआ (याति) = हमें प्राप्त होता है, शरीर के अंग-प्रत्यंग में गतिवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-स्तुति - वाणियों से परिष्कृत हुआ हुआ सोम हमें पवित्र करता है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (गीर्भिः परिष्कृतः) वेदवाग्भिः स्तुतः (हर्यतः सोमः) दर्शनीयः परमात्मा (पुनानः) पवित्रयन् (मेध्यातिथेः विप्रस्य) ज्ञानयोगिनो विदुषो हृदये (याति) निवसति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Pure and purifying, blissful in experience, adored and glorified with songs of divinity by the vibrant sagely celebrant dedicated to the yoga of the knowledge way, Soma vibrates in the soul.