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त्वं सूर्ये॑ न॒ आ भ॑ज॒ तव॒ क्रत्वा॒ तवो॒तिभि॑: । अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvaṁ sūrye na ā bhaja tava kratvā tavotibhiḥ | athā no vasyasas kṛdhi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम् । सूर्ये॑ । नः॒ । आ । भ॒ज॒ । तव॑ । क्रत्वा॑ । तव॑ । ऊ॒तिऽभिः॑ । अथ॑ । नः॒ । वस्य॑सः । कृ॒धि॒ ॥ ९.४.५

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:4» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:22» मन्त्र:5 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:5


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! तुम (नः) हमको (सूर्ये) ज्ञान प्रदान के लिये (आभज) आकर प्राप्त हो। (क्रत्वा) यज्ञों द्वारा (अथ तव ऊतिभिः) और अपनी रक्षा द्वारा (नः) हमको (वस्यसस्कृधि) सुखी बनाओ ॥५॥
भावार्थभाषाः - हे परमात्मन् ! आप ज्ञान और कर्म द्वारा हमारी सर्वदा रक्षा करें और ऐहिक तथा पारलौकिक सुख से हमको सदैव सम्पन्न करें ॥५॥२२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

नीरोग प्रकाशमय जीवन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (त्वम्) = तू (तव क्रत्वा) = तेरे द्वारा उत्पन्न प्रज्ञान से तथा (तव ऊतिभिः) = तेरे से किये गये रक्षणों से (नः) = हमें (सूर्ये आभज) = ज्ञान सूर्य में भागी बना । सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनता है, इसी से हमारे जीवनों में ज्ञानसूर्य के उदय का सम्भव होता है। यह सोम हमें रोगों से भी बचाता है और इस प्रकार अविच्छिन्न स्वाध्याय के द्वारा हम ज्ञानसूर्य का अपने में उदय करनेवाले होते हैं । [२] हे सोम ! इस प्रकार प्रज्ञान व रक्षणों के द्वारा (अथाः अव नः) = हमें (वस्यसः कृधि) = उत्कृष्ट जीवनवाला करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमारी ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है तथा रोगों के आक्रमण से हमारा रक्षण करता है । इस प्रकार हमें नीरोग व प्रकाशमय जीवन प्राप्त कराता है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (त्वम्) भवान् (नः) अस्मभ्यं (सूर्ये) ज्ञानं प्रदातुम् (आभज) आगत्य तिष्ठतु (क्रत्वा) यज्ञेन (अथ, तव, ऊतिभिः) अथ च स्वीयरक्षाभिः (नः) अस्मान् (वस्यसः, कृधि) सुखिनः करोतु ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma take us high to the light of the sun in knowledge and purity by your noble speech and action and by your paths of protection and progress, and thus make us happy and prosperous more and ever more.