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पवी॑तारः पुनी॒तन॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे । अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pavītāraḥ punītana somam indrāya pātave | athā no vasyasas kṛdhi ||
पद पाठ
पवी॑तारः । पु॒नी॒तन॑ । सोम॑म् । इन्द्रा॑य । पात॑वे । अथ॑ । नः॒ । वस्य॑सः । कृ॒धि॒ ॥ ९.४.४
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ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:4» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:22» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:4
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवीतारः) हे विद्वान् लोगो ! तुम (इन्द्राय पातवे) ऐश्वर्य्याधिकारी पुरुष के लिये (सोमम्) सौम्यस्वभाववाले परमात्मा का (पुनीतन) वर्णन करो (अथ) और यह प्रार्थना करो कि (नः) हमको वह परमात्मा (वस्यसस्कृधि) मोक्षसुख का भागी बनाए ॥४॥
भावार्थभाषाः - विद्वान् लोग जब किसी पुरुष को दीक्षित करें, तो शान्त्यादि गुणसम्पन्न परमात्मा का सबसे प्रथम उपदेश करें। तदनन्तर अभ्युदय और निःश्रेयस का विस्तृत उपदेश करके इस सांसारिक यात्रा में दक्ष बनाएँ ॥४॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोम का पवित्रीकरण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (पवीतारः) = हमारे जीवनों को ज्ञान देकर पवित्र करनेवाले आचार्यो ! आप हमारे (सोमम्) = सोम को (पुनीतन) = पवित्र करो । ज्ञान के द्वारा वासनाओं का विनाश हो और यह सोम सदा पवित्र बना रहे। यह सोम (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (पातवे) = पीने के लिये हो । एक जितेन्द्रिय पुरुष इस सोम को अपने अन्दर ही सुरक्षित करनेवाला हो। [२] इस प्रकार हमारे सोम को वासनाओं से मलिन न होने देकर आप (अथा) = अब (नः) = हमें (वस्यसः कृधि) = उत्कृष्ट जीवनवाला करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम ज्ञान को प्राप्त करते हुए सोम को वासनाओं से अपवित्र न होने दें। इस प्रकार रक्षित सोम से हमारा जीवन श्रेष्ठ बनेगा ।
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (पवीतारः) हे विद्वांसः ! यूयं (इन्द्राय, पातवे) ऐश्वर्य्याधिकारिणे पुरुषाय (सोमम्) सौम्यस्वभावं परमात्मानं (पुनीतन) वर्णयत (अथ) अथेदं प्रार्थयध्वं यत् (नः) अस्मान् स परमात्मा (वस्यसः, कृधि) मोक्षानन्दभाजः करोतु ॥४॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O sages, harbingers of purity, purify and enhance the soma spirit of peace and joy for Indra, the growth of power, protection and excellence of the world and thus make us happy and prosperous more and ever more.
