सना॒ ज्योति॒: सना॒ स्व१॒॑र्विश्वा॑ च सोम॒ सौभ॑गा । अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sanā jyotiḥ sanā svar viśvā ca soma saubhagā | athā no vasyasas kṛdhi ||
पद पाठ
सना॑ । ज्योतिः॑ । सना॑ । स्वः॑ । विश्वा॑ । च॒ । सो॒म॒ । सौभ॑गा । अथ॑ । नः॒ । वस्य॑सः । कृ॒धि॒ ॥ ९.४.२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:4» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:22» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:2
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यस्वभावयुक्त परमात्मन् ! (सन, ज्योतिः) सदा ज्योतिःस्वरूप हो (च) और (सन, स्वः) सदा सुखस्वरूप हो (विश्वा) सम्पूर्ण (सौभगा) सोभाग्यदायक वस्तुएँ आप हमको दें (अथ) और (नः) हमको (वस्यसस्कृधि) मुक्ति सुख दें ॥२॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा नित्य-शुद्ध-बुद्ध-मुक्त स्वभाव है। उसी की कृपा से नाना विधि के सौभाग्य मिलते हैं और मोक्षसुख मिलता है ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
ज्योति स्वर्ग [सुख] सौभाग्य
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! तू हमें (ज्योति: सन) = ज्ञान की ज्योति को प्राप्त करा । सोम ने ही तो ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर हमारी ज्ञान ज्योति को दीप्त करना है। इस प्रकार ज्ञान को देकर हे सोम ! तू हमें (स्वः सन) = स्वर्ग सुख को देनेवाला हो । अज्ञान ही सब क्लेशों का मूल है। 'अविद्या क्षेत्रमुत्तरेणाम्' अविद्या रूप क्षेत्र में ही सब कष्टों का जन्म होता है। [२] इस प्रकार ज्ञान- ज्योति व स्वर्ग सुखों को प्राप्त करके हे सोम ! तू (विश्वा सौभगा च) = सब सौभाग्यों को भी [सना = ] हमें प्राप्त करानेवाला हो। हमारे जीवनों को 'समग्र ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान व अनासक्ति' रूप छः के छ: सौभाग्यों से युक्त कर । 'ऐश्वर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यशसः श्रिया, ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरणा' । (अथा) = अब (नः) = हमें सौभाग्य-सम्पन्न करके (वस्यसः) = उत्कृष्ट जीवनवाला (कृधि) = कर ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमारे जीवनों को 'ज्योति-सुख व सौभाग्य' सम्पन्न करता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यस्वभावयुक्त परमात्मन् ! (सन, ज्योतिः) सदा ज्योतीरूपन्देहि (च) अथ च (सन, स्वः) सदा सुखन्देहि (विश्वा) सर्वं (सौभगा) सौभाग्यदातृ वस्तु देहि (अथ) किञ्च (नः) अस्मभ्यं (वस्यसस्कृधि) मुक्तिं देहि ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, spirit of divine love and joy, give us eternal light, give us heavenly joy, and give us all good fortunes of the world and make us happy and prosperous more and ever more.
