वांछित मन्त्र चुनें

स॒मी॒ची॒ना अ॑नूषत॒ हरिं॑ हिन्व॒न्त्यद्रि॑भिः । योना॑वृ॒तस्य॑ सीदत ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

samīcīnā anūṣata hariṁ hinvanty adribhiḥ | yonāv ṛtasya sīdata ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒मी॒ची॒नाः । अ॒नू॒ष॒त॒ । हरि॑म् । हि॒न्व॒न्ति॒ । अद्रि॑ऽभिः । योनौ॑ । ऋ॒तस्य॑ । सी॒द॒त्च ॥ ९.३९.६

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:39» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:29» मन्त्र:6 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:6


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (हरिम्) पापों को नाश करनेवाले आपकी (समीचीनाः) सत्कर्मी ऋत्विगादि लोग (अनूषत) स्तुति करते हैं। तथा (अद्रिभिः हिन्वन्ति) इन्द्रियवृत्तियों द्वारा ज्ञान का विषय बनाते हैं (ऋतस्य योनौ सीदत) हे परमात्मन् ! आप सत्य की योनि यज्ञ में स्थित होवें ॥६॥
भावार्थभाषाः - याज्ञिक पुरुष अपने अन्तःकरण को यज्ञवेदिस्थानी बनाकर परमात्मज्ञान को हवनीय बनाकर इस ज्ञानमय यज्ञ से प्रजा को सुगन्धित करते हैं। तात्पर्य यह है कि अध्यात्मयज्ञ ही एकमात्र परमात्मप्राप्ति का मुख्य साधन है, अन्य जलस्थलादि कोई वस्तु भी परमात्मप्राप्ति का मुख्य साधन नहीं ॥६॥ यह ३९ वाँ सूक्त और २९ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

समीचीनाः अनूषत

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (समीचीनाः) = सम्यक् गतिवाले पुरुष अथवा मिलकर चलनेवाले पुरुष अनूषत उस प्रभु का स्तवन करते हैं । इन (अद्रिभिः) = उपासनाओं के द्वारा (हरिम्) = सब दुःखों का हरण करनेवाले सोम को (हिन्वन्ति) = शरीर के अन्दर ही प्रेरित करते हैं । [२] हे उपासको ! इस सोम के रक्षण के द्वारा तुम (ऋतस्य योनौ) = ऋत के उत्पत्ति स्थान प्रभु में सीदत बैठो। सोमरक्षण हमें उत्कृष्ट जीवनवाला बनाता हुआ अन्ततः प्रभु प्राप्ति का पात्र बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - उपासना से सोम शरीर में सुरक्षित होता है। इसके द्वारा हम प्रभु को प्राप्त करनेवाले बनते हैं । अगले सूक्त में भी 'बृहन्मति' ही सोम के विषय में कहता है-
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (हरिम्) पापानां विनाशयितारं भवन्तं (समीचीनाः) सत्कर्मिण ऋत्विगादयः (अनूषत) स्तुवन्ति (अद्रिभिः हिन्वन्ति) इन्द्रियवृत्तिभिः ज्ञानविषयीकुर्वन्ति। (ऋतस्य योनौ सीदत) हे भगवन् ! सत्यस्य योनौ यज्ञे तिष्ठ ॥६॥ इति एकोनचत्वारिंशत्तमं सूक्तमेकोनत्रिंशत्तमो वर्गश्च समाप्तः ॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Devoted yajakas in faith and perfect form together adore and glorify Soma, eliminator of pain, and with adamantine practice of meditation stimulate its presence to power and ecstasy for themselves. O Soma, pray, arise and bless the yajnic as well as the psychic vedi with your presence, the vedi that is your own seat of Truth and divine Law.