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अ॒यं स यो दि॒वस्परि॑ रघु॒यामा॑ प॒वित्र॒ आ । सिन्धो॑रू॒र्मा व्यक्ष॑रत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayaṁ sa yo divas pari raghuyāmā pavitra ā | sindhor ūrmā vy akṣarat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒यम् । सः । यः । दि॒वः । परि॑ । र॒घु॒ऽयामा॑ । प॒वित्रे॑ । आ । सिन्धोः॑ । ऊ॒र्मा । वि । अक्ष॑रत् ॥ ९.३९.४

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:39» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:29» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:4


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अयम् सः) यह वह परमात्मा है (यः) जो कि (दिवस्परि) अन्तरिक्ष के भी ऊर्ध्वभाग में वर्तमान है (रघुयामा) और शीघ्र प्रगतिवाला है (पवित्रे आ) और ज्ञानयोगियों के पवित्र अन्तःकरण में निवास करता है तथा (सिन्धोः ऊर्मा व्यक्षरत्) जो स्यन्दन शक्ति उत्पन्न करता है ॥४॥
भावार्थभाषाः - उसी परमात्मा की अद्भुत शक्ति और सत्ता से सूर्यचन्द्रमादिकों का परिभ्रमण और नदियों का प्रवहन इत्यादि सम्पूर्ण गतियें उत्पन्न होती हैं ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

द्युक से भी परे

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अयम्) = यह (सः) = वह सोम (यः) = जो कि (दिवः परि) = द्युलोक के भी (परे रघुयामा) = शीघ्र गमनवाला होता है, वह (पवित्रे) = पवित्र हृदयवाले पुरुष में (आ वि अक्षरत्) = संचलनवाला होता है । सोम शरीर में सुरक्षित होने पर हमें पृथिवी पृष्ठ से अन्तरिक्ष में, अन्तरिक्ष से द्युलोक में, द्युलोक से भी परे स्वर्लोक में ले जानेवाला होता है। [२] यह सोम हमें (सिन्धोः ऊर्मा) = ज्ञान-समुद्र की तरंगों में ले चलनेवाला होता है, सुरक्षित सोम बुद्धि को सूक्ष्म बनाता है। इस सूक्ष्म बुद्धि से ज्ञानजल का सिन्धु प्रवाहित होता है। हम इस सिन्धु की तरंगों में तैरनेवाले बनते हैं। यह ज्ञान ही तो हमें द्युलोक से भी ऊपर ब्रह्मलोक में पहुँचाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें द्युलोक से ऊपर स्वर्लोक में ले चलता है। यह हमें ज्ञान - समुद्र की तरंगों में तरानेवाला होता है।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अयम् सः) अयं स परमात्मास्ति (यः दिवस्परि) द्युलोकादप्यूर्ध्वभागे वर्तमानः (रघुयामा) शीघ्रगामी (पवित्रे आ) ज्ञानयोगिनामन्तःकरणे निवासी (सिन्धोः ऊर्मा व्यक्षरत्) स्यन्दनशीलनद्यादिषु स्यन्दनशक्तिं जनयति ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This Soma is the spirit of joy which, at instant and universal speed, descends and manifests in the devotee’s pure soul from the light of divinity and stimulates oceanic waves of ecstasy to roll in the heart.