वांछित मन्त्र चुनें

ए॒ष स्य मद्यो॒ रसोऽव॑ चष्टे दि॒वः शिशु॑: । य इन्दु॒र्वार॒मावि॑शत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

eṣa sya madyo raso va caṣṭe divaḥ śiśuḥ | ya indur vāram āviśat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ए॒षः । स्यः । मद्यः॑ । रसः॑ । अव॑ । च॒ष्टे॒ । दि॒वः । शिशुः॑ । यः । इन्दुः॑ । वार॑म् । आ । अवि॑शत् ॥ ९.३८.५

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:38» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:28» मन्त्र:5 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:5


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मद्यः) आह्लादजनक (रसः) आनन्दरूप (दिवः शिशुः) द्युलोक का शासक (एषः स्यः) यह परमात्मा (अवचष्टे) सबको देखता है (यः इन्दुः) जो परमैश्वर्यवाला परमात्मा (वारम् आविशत्) स्तोता विद्वान् के अन्तःकरण में प्रविष्ट होता है ॥५॥
भावार्थभाषाः - इस संसार में सर्वद्रष्टा एकमात्र परमात्मा ही है। उससे भिन्न सब जीव अल्पज्ञ हैं। योगी पुरुष भी अन्यों की अपेक्षा सर्वज्ञ कहे जाते हैं, वास्तव में सर्वज्ञ नहीं ॥५॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मद्यः रसः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (एषः) = यह (स्यः) = प्रसिद्ध (मद्यः) = आनन्द को देनेवालों में उत्तम (रस:) = रसरूप सोम (अवचष्टे) = रक्षित होने पर हमारा ध्यान करता है [अवपश्यति = looks after]। हमें रोग आदि से आक्रान्त नहीं होने देता। यह सोम (दिवः शिशुः) = ज्ञान का सूक्ष्म करनेवाला है। बुद्धि को तीव्र बनाकर ज्ञान का वर्धन करनेवाला है । [२] (यः) = जो (इन्दुः) = हमें शक्तिशाली बनानेवाला सोम (वारम्) = सब वासनाओं का निवारण करनेवाले व्यक्ति में (आविशत्) = प्रवेश करता है । जब हम वासनाओं का निवारण करते हैं तो इस सोम का अधिष्ठान बनते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - यह सोम 'मद्य रस' है। वासनाओं का निवारण करने पर इसे हम सुरक्षित कर पाते हैं।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मद्यः) आह्लादजनकः (रसः) आनन्दरूपः (दिवः शिशुः) द्युलोकस्य शास्ता (एषः स्यः) अयं परमात्मा (अवचष्टे) सर्वं पश्यति (यः इन्दुः) परमैश्वर्ययुक्तो यः परमात्मा (वारम् आविशत्) स्तोतुर्विदुषोऽन्तःकरणे प्रविशति ॥५॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This ecstatic bliss, honey sweet of life’s joy, appears like the rising sun at dawn when, as the beauty and glory of existence, it reflects in the heart of the chosen soul.