स त्रि॒तस्याधि॒ सान॑वि॒ पव॑मानो अरोचयत् । जा॒मिभि॒: सूर्यं॑ स॒ह ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa tritasyādhi sānavi pavamāno arocayat | jāmibhiḥ sūryaṁ saha ||
पद पाठ
सः । त्रि॒तस्य॑ । अधि॑ । सान॑वि । पव॑मानः । अ॒रो॒च॒य॒त् । जा॒मिऽभिः॑ । सूर्य॑म् । स॒ह ॥ ९.३७.४
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:37» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:27» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:4
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह परमात्मा (त्रितस्य अधिसानवि) नीतिशास्त्रों में सर्वोपरि नेता है (पवमानः) लोकों को शुद्ध करनेवाले उसी परमात्मा ने (जामिभिः सह) तेजों के सहित (सूर्यम् अरोचयत्) सूर्य को देदीप्यमान किया ॥४॥
भावार्थभाषाः - सब प्रकार की विद्यायें उसी परमात्मा से मिलती हैं और वही परमात्मा राजनीति से राजधर्मों का निर्माता तथा विधाता है ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
जामिभिः- सूर्यं सह
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सः) = वह सोम (त्रितस्य) = ' काम-क्रोध-लोभ' इन तीनों को तैर जानेवाले के (अधि सानवि) = शिखर प्रदेश में, अर्थात् मस्तिष्क में (पवमानः) = पवित्रता को करता हुआ (सूर्यम्) = ज्ञान के सूर्य को (अरोचयत्) = दीप्त करता है । सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है । [२] (जामिभिः सह) = सद्गुणों को प्रादुर्भाव के साथ यह सोम ज्ञान सूर्य को दीप्त करता है। ज्ञान को तो यह बढ़ाता ही है। साथ ही यह सद्गुणों का भी हमारे में विकास करता है। ज्ञान के साथ मौन, शक्ति के साथ क्षमा, अभ्युदय के साथ विनय आदि गुण सोमरक्षण के होने पर ही पनपते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-काम-क्रोध-लोभ को तैरनेवाले के जीवन में सुरक्षित होकर सोम सद्गुणों को जन्म देता है और ज्ञान सूर्य को दीप्त करता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) स परमात्मा (त्रितस्य अधिसानवि) सर्वोपरि निपुणः (पवमानः) लोकस्य पविता (जामिभिः सह) तेजोभिः सहितं (सूर्यम् अरोचयत्) सूर्यम् अदिदीपत् ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, pure, purifying, and all pervasive across and ever on top of the three worlds of space and three dimensions of time, shines with the sun and other kindred luminaries.
