प्र सोमो॒ अति॒ धार॑या॒ पव॑मानो असिष्यदत् । अ॒भि द्रोणा॑न्या॒सद॑म् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pra somo ati dhārayā pavamāno asiṣyadat | abhi droṇāny āsadam ||
पद पाठ
प्र । सोमः॑ । अति॑ । धार॑या । पव॑मानः । अ॒सि॒स्य॒द॒त् । अ॒भि । द्रोणा॑नि । आ॒ऽसद॑म् ॥ ९.३०.४
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:30» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:20» मन्त्र:4
| मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:4
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोमः) परमात्मा (धारया) अपनी कृपा की दृष्टिरूप धाराओं से (पवमानः) पवित्र करता हुआ ज्ञान के प्रभाव से (अभि द्रोणानि आसदम्) उन अन्तःकरणों को प्राप्त होता है, जो अन्तःकरण सत्कर्मों द्वारा किये हुए होते हैं ॥४॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा उपदेश करता है कि हे मनुष्यों ! यदि तुम अपने आपको सत्कर्मी बनाओ, तो ज्ञान का प्रवाह तुम्हारे अभ्युदयरूपी अङ्कुरों को अवश्यमेव अभ्युदयशाली बनायेगा ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अभि द्रोणानि
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सोमः) = सोम (धारया) = अपनी धारणशक्ति के साथ (पवमानः) = हमारे जीवनों को पवित्र करता हुआ (प्र अति असिष्यदत्) = खूब ही शरीर में प्रवाहित होता है । [२] यह सोम स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर व कारण शरीर रूप (द्रोणानि) = पात्रों में (अभि आसदम्) = आभिमुख्येन प्राप्त होने के लिये होता है। शरीरों में स्थित होता हुआ यह उन्हें अपनी-अपनी शक्ति से युक्त करता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित हुआ हुआ सोम सब कोशों को पवित्र करनेवाला होता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोमः) परमात्मा (धारया) स्वानुग्रहदृशा धाराभिः (पवमानः) पवित्रयन् ज्ञानप्रभावेण (अभि द्रोणानि आसदम्) तान्यन्तःकरणानि प्राप्तुमिच्छन्ति यानि सत्कर्मभिः (प्रासिष्यत्) शुद्धीकृतानि भवन्ति ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Let soma, pure and purifying lord of peace, light and power, flow and advance in shower and streams of innocence and purity into the celebrants’ heart and soul.
