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तन्तुं॑ तन्वा॒नमु॑त्त॒ममनु॑ प्र॒वत॑ आशत । उ॒तेदमु॑त्त॒माय्य॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tantuṁ tanvānam uttamam anu pravata āśata | utedam uttamāyyam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तन्तु॑म् । त॒न्वा॒नम् । उ॒त्ऽत॒मम् । अनु॑ । प्र॒ऽवतः॑ । आ॒श॒त॒ । उ॒त । इ॒दम् । उ॒त्त॒माय्य॑म् ॥ ९.२२.६

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:22» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:12» मन्त्र:6 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:6


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (प्रवतः) गतिशील ब्रह्माण्ड (तन्तुम् तन्वानम्) उत्तम परमाणुप्रबन्ध को बढ़ाते हुए (इदम्) इतने (उत्तमाय्यम्) उत्तम कार्यों से (उत अन्वाशत) व्याप्त हो रहे हैं ॥६॥
भावार्थभाषाः - प्रत्येक ब्रह्माण्ड मानों तन्तुरूप से अर्थात् रचनारूप यज्ञ से परमात्मा की संसृति को बढ़ा रहा है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उत्तमाय्य का व्यापन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (उत्तमम्) = सर्वोत्कृष्ट 'यज्ञ-तप-दान' रूप (तन्तुम्) = कर्मतन्तु को (तन्वानम्) = विस्तृत करते हुए इस सोम के अनुरक्षण के अनुसार, अर्थात् जितना-जितना सोम का रक्षण करते हैं उतना-उतना (प्रवतः) = [Height, elevation ] उन्नत स्थितियों को व्याप्त करते हैं । [२] (उत) = और अन्ततोगत्वा (इदम्) = इस (उत्तमाप्यम्) = उत्तम लोगों से प्राप्त होने योग्य मोक्षलोक को व्याप्त करनेवाले होते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर में सुरक्षित सोम हमें उत्तम कर्मों में प्रेरित करता हुआ उन्नत लोकों को प्राप्त कराता है, अन्ततः मोक्ष लोक का हमें अधिकारी बनाता है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (प्रवतः) गतिशीलब्रह्माण्डानि (इदम्) उत्तमं (तन्तुम् तन्वानम्) उत्तमं परमाणुप्रबन्धं वर्धयन्ति सन्ति (उत्तमाय्यम्) उत्तमकार्यैः (उत अन्वाशत) व्याप्नुवन्ति ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Moving on with the flow of life across the expansive web of creative existence, they reach the ultimate where life can reach, the infinite.