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ए॒ते पू॒ता वि॑प॒श्चित॒: सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः । वि॒पा व्या॑नशु॒र्धिय॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ete pūtā vipaścitaḥ somāso dadhyāśiraḥ | vipā vy ānaśur dhiyaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ए॒ते । पू॒ताः । वि॒पः॒ऽचितः॑ । सोमा॑सः । दधि॑ऽआशिरः । वि॒पा । वि । आ॒न॒शुः॒ । धियः॑ ॥ ९.२२.३

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:22» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:12» मन्त्र:3 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:3


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पूताः) पवित्र (एते सोमासः) ये सब उत्पन्न हुए ब्रह्माण्ड (दध्याशिरः) सबके धारक आश्रयभूत (विपा) ज्ञानद्वारा (विपश्चितः) विद्वानों की (धियः) बुद्धि का (व्यानशुः) विषय होते हैं ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा की रचना में जो कोटानुकोटि ब्रह्माण्ड हैं, वे सब ज्ञानी विज्ञानियों के ही समझ में आ सकते हैं, अन्यों के नहीं ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

विपश्चितः दध्याशिरः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (एते) = ये (सोमास:) = सोमकण (पूता:) = शुद्ध रखे जाने पर इनमें वासनाओं का उबाल न आने देने पर (विपश्चितः) = ये ज्ञानी होते हैं, अर्थात् हमें ज्ञानी बनाते हैं। सोमरक्षण करनेवाला पुरुष विशेषरूप से बारीकी से देखता हुआ चिन्तनशील होता है। ये सोमकण (दध्याशिरः) = [ धत्ते बलं इति दधि, आशृणाति] बल को धारण करनेवाले व रोगकृमियों का विनाश करनेवाले होते हैं । [२] ये सोमकण (धियः) = हमारे ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले इन कर्मों को (विपा) = [विप् Hymns] स्तोत्रों से (व्यानशुः) = व्याप्त कर देते हैं । अर्थात् सोमरक्षण करने पर हम [क] कर्मशील होते हैं, [ख] कर्मों को बुद्धिपूर्वक करते हैं, [ग] उन कर्मों को प्रभु स्मरण के साथ करते हैं। ऐसा करने से हमारे कर्म पवित्र बने रहते हैं और हमें उन कर्मों का अहंकार नहीं होता ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर में सुरक्षित पवित्र सोमकण हमारा धारण करते हैं । रोगकृमियों का विनाश करते हैं। सोमरक्षण करने पर हम कर्मों को ज्ञानपूर्वक प्रभु स्मरण के साथ करते हैं ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पूताः) पवित्राणि (एते सोमासः) इमानि ब्रह्माण्डानि (दध्याशिरः) सर्वस्य धातॄणि (विपा) ज्ञानद्वारा (विपश्चितः) विदुषां (धियः) बुद्धीनां (व्यानशुः) विषयीभूतानि भवन्ति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - These living floods of energy, vibrant courses, soothing moons, blazing suns and whirling galaxies, pure somas all blest by light and will divine of the centre hold of life, inspire the will and awareness of thinking men.