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स हि ष्मा॑ जरि॒तृभ्य॒ आ वाजं॒ गोम॑न्त॒मिन्व॑ति । पव॑मानः सह॒स्रिण॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sa hi ṣmā jaritṛbhya ā vājaṁ gomantam invati | pavamānaḥ sahasriṇam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सः । हि । स्म॒ । ज॒रि॒तृऽभ्यः॑ । आ । वाज॑म् । गोऽम॑न्तम् । इन्व॑ति । पव॑मानः । स॒ह॒स्रिण॑म् ॥ ९.२०.२

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:20» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:10» मन्त्र:2 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:2


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सः हि ष्म) वही (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला परमात्मा (जरितृभ्यः) अपने बलहीन उपासकों को (आ) भली प्रकार (सहस्रिणम्) हजारों प्रकार के (गोमन्तम्) बुद्धि के सहित (वाजिनम्) बलों को (इन्वति) देता है ॥२॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा परमात्मपरायण पुरुषों को अनन्त प्रकार का बल और बुद्धि प्रदान करता है ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गोमान् वाज

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सः) = वह (पवमानः) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाला सोम (हि ष्मा) = निश्चय से (जरितुभ्यः) = उपासकों के लिये (गोमन्तम्) = प्रशस्त इन्द्रियोंवाले (सहस्रिणम्) = प्रसन्नता से परिपूर्ण (वाजम्) = बल को (आ इन्वति) = शरीर में सर्वत्र व्याप्त करता है। [२] सोम का रक्षण होने पर यह हमें पवित्र बनाता है [ पवमानः ], हमारी वृत्ति को उपासनामय करता है [ जरितृभ्यः ] इन्द्रियों को प्रशस्त करता है [गोमान्] हमारे जीवन को आनन्दमय बनाता है [सहस्रिणं] हमारे में शक्ति का सञ्चार करता है [वाजम्]।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम सोम का रक्षण करें। यह रक्षित सोम हमें प्रशस्त इन्द्रियों से युक्त आनन्दमय शक्ति को प्राप्त कराये ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सः हि ष्म) स हि पूर्वोक्तः (पवमानः) सर्वेषां पावयिता परमात्मा (जरितृभ्यः) स्वदुर्बलोपासकेभ्यः (आ) सम्यक् (सहस्रिणम्) अनेकविधं (गोमन्तम्) बुद्धिसहितं (वाजिनम्) बलं (इन्वति) प्रयच्छति ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - He alone, pure, purifying and dynamic, brings for the celebrants thousandfold food, energy and advancement with victory inspired and infused with intelligence, knowledge, culture and enlightenment.