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तव॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सो दे॒वास॑: पी॒तिमा॑शत । मदे॑षु सर्व॒धा अ॑सि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tava viśve sajoṣaso devāsaḥ pītim āśata | madeṣu sarvadhā asi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तव॑ । विश्वे॑ । स॒ऽजोष॑सः । दे॒वासः॑ । पी॒तिम् । आ॒श॒त॒ । मदे॑षु । स॒र्व॒ऽधाः । अ॒सि॒ ॥ ९.१८.३

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:18» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:8» मन्त्र:3 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:3


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (तव पीतिम्) आपकी तृप्ति को (सजोषसः) परस्पर प्रेम करनेवाले (विश्वे देवासः) सब विज्ञानी लोग (आशत) पाते हैं (मदेषु) हर्षयुक्त वस्तुओं में (सर्वधाः) सब प्रकार की शोभा के धारण करानेवाले (असि) आप हैं ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा के आनन्द को विज्ञानी लोग ही वस्तुतः पा सकते हैं, अन्य नहीं। कारण यह कि विविध प्रकार के ज्ञान के विना उसका आनन्द मिलना अति कठिन है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

देवों से पेय सोम

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (विश्वे) = सब (सजोषसः) = प्रीतिपूर्वक कर्त्तव्य कर्मों का सेवन करनेवाले [जुषी प्रीति सेवनयोः] (देवासः) = देववृत्ति के लोग (तव) = तेरे (पीतिम्) = पान को (आशत) = [ प्राप्नुवन्] प्राप्त करते हैं। सोमरक्षण के लिये आवश्यक है कि- [क] हम देववृत्ति के बनें और [ख] अपने कर्त्तव्य कर्मों में लगे रहें । [२] सुरक्षित होने पर हे सोम ! तू (मदेषु) = उल्लासों के होने पर (सर्वधाः) = शरीर, मन, बुद्धि सबका धारण करनेवाला (असि) = है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- देववृत्ति के कर्त्तव्यपरायण लोग ही सोम का रक्षण कर पाते हैं ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - हे परमात्मन् ! (तव पीतिम्) भवतस्तृप्तिं (सजोषसः) परस्परप्रेमकर्तारः (विश्वे देवासः) सर्वे विज्ञानिनः (आशत) प्राप्नुवन्ति (मदेषु) हर्षयुक्तवस्तुषु (सर्वधाः) सर्वविधशोभानां जनकः (असि) त्वमेवासि ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - All divinities of nature and humanity in love and faith with you yearn to drink of the divine nectar and they are blest with it. You are the sole sustainer of all in bliss divine.